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हिमाचल: राजेश धर्माणी बोले- तकनीकी शिक्षण संस्थानों के लिए 35.34 करोड़ रुपये जारी

Tue, 29 Sep 2026 09:58 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

सरकार ने तकनीकी शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के विभिन्न आईटीआई, पॉलिटेक्निक और तकनीकी संस्थानों के विकास कार्यों के लिए 35.34 करोड़ रुपये जारी किए हैं। 
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तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी । - फोटो : अमर उजाला
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 हिमाचल प्रदेश सरकार ने तकनीकी शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के विभिन्न आईटीआई, पॉलिटेक्निक और तकनीकी संस्थानों के विकास कार्यों के लिए 35.34 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इससे प्रदेश के युवाओं को आधुनिक सुविधाओं से युक्त प्रशिक्षण मिलेगा और उन्हें रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि सरकार तकनीकी संस्थानों को अत्याधुनिक बनाने के मिशन पर काम कर रही है।

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बदलते औद्योगिक और तकनीकी परिवेश को देखते हुए विद्यार्थियों को आधुनिक कौशल, नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में किया जा रहा यह निवेश प्रदेश के युवाओं के भविष्य को नई दिशा देगा। जारी राशि में जिला कांगड़ा को सबसे अधिक लाभ मिला है। आईटीआई बैजनाथ के लिए तीन करोड़, आदर्श आईटीआई संसारपुर-टैरेस के लिए 1.75 करोड़, राजकीय फार्मेसी कांगड़ा में सरकारी आवास निर्माण के लिए 2.29 करोड़, राजकीय पॉलिटेक्निक कांगड़ा में अकादमिक ब्लॉक-बी के लिए तीन करोड़ तथा नगरोटा बगवां के बलधर में स्टेट ऑफ द आर्ट आईटीआई भवन के लिए 3.50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
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सिरमौर जिले में भी तकनीकी शिक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए आईटीआई सराहां को 3.71 करोड़, आईटीआई कफोटा को 5.83 करोड़ और आईटीआई कौलावाला भूड़ को 3.42 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा कुल्लू पॉलिटेक्निक के छात्रावास, ऊना के आईटीआई भद्रकाली और मंडी के आईटीआई करसोग भवन के लिए भी करोड़ों रुपये जारी किए गए हैं। तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही है। इसी उद्देश्य से तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थियों को जापान और कजाकिस्तान जैसे देशों के शैक्षणिक भ्रमण भी करवाए गए हैं, ताकि वे नई तकनीकों और उद्योगों की कार्यप्रणाली को समझ सकें। सरकार स्टार्टअप संस्कृति, सॉफ्ट स्किल विकास और आधुनिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
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