सीएम ने नई नीति को दो माह के भीतर लाने के निर्देश दिए हैं। सिंगल विंडो की बैठक में फार्मा, ऑटोमोबाइल, वस्त्र, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक एवं पैकेजिंग, खाद्य प्रसंस्करण, कॉस्मेटिक्स और स्टील जैसे उद्योगों के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश के औद्योगिक आधार में विविधता आएगी और संतुलित विकास को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार श्रम प्रधान उद्योगों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है ताकि युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार अवसर पैदा किए जा सकें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नई औद्योगिक नीति को अगले दो महीनों के भीतर अधिसूचित किया जाए, ताकि पड़ोसी राज्यों के साथ निवेश आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा और मजबूत हो सके।
औद्योगिक निवेश की कन्वर्जन दर 57 फीसदी, राष्ट्रीय औसत से ज्यादा उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल, मजबूत आधारभूत ढांचा और प्रभावी सिंगल विंडो प्रणाली के कारण हिमाचल प्रदेश में निवेश बढ़ रहा है। पिछले तीन वर्षों में प्रदेश में औद्योगिक निवेश की कन्वर्जन दर 57 प्रतिशत रही है, जो राष्ट्रीय औसत 32 से 35 प्रतिशत से काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां, मजबूत बुनियादी ढांचा और कुशल सिंगल विंडो क्लीयरेंस के जरिये व्यापार करना आसान बना रहे हैं। बैठक में मुख्य सचिव केके पंत, एसीएस आरडी नजीम, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, वित्त सचिव अभिषेक जैन, उद्योग विभाग के निदेशक यूनुस, अतिरिक्त निदेशक तिलकराज शर्मा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।