समाजसेवा से जुड़ी डॉ अंजू वाजपेयी और डॉ गुरप्रीत कौर की दोस्ती जिलेे के लोगों के लिए एक मिसाल बनी हुई है। अविवाहित डॉ गुरप्रीत और शादी-शुदा डॉ वाजपेयी पिछले 25 सालों से एक ही छत के नीचे रह रही हैं। ये दोनों सहेलियां मूक बधिर बच्चों के लिए काम कर रही उत्थान संस्था से जुड़ी हैं। डॉ वाजपेयी संस्था की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और गुरप्रीत कौर सेक्रेटरी है। इसके अलावा महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ भी दोनों सहेलियां आवाज उठाती रही हैं।
डॉ. वाजेपयी ने बताया कि प्रीति से उनकी दोस्ती स्कूल टाइम से है। उस दौरान ही प्रीति ने शादी न करने का इरादा कर लिया था। दोनों ने एक साथ ही कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर ली। बड़ी होने पर डॉ वाजपेयी की इसी शहर में शादी हो गई। शादी से पहले ही दोनों समाजसेवा के कार्य करती थी। शादी के बाद डॉ वाजपेयी ने मूक बधिर बच्चों के लिए संस्था खोलने का मन बनाया। उन्होंने डॉ गुरप्रीत से बात की तो वे भी इसके लिए तैयार हो गई। डॉ वाजपेयी के पति शहर के बाहर जॉब करते थे। संस्था खोलने के बाद डॉ वाजपेयी ने अपनी सहेली से कहा कि वह उनके साथ आकर रहे, क्योंकि उन्हें रोज संस्था में आना-जाना पड़ता था। इसके बाद डॉ गुरप्रीत डॉ वाजेपयी के परिवार के साथ रहने लगी। डॉ वाजपेयी के बच्चे हुए तो वे भी डॉ गुरप्रीत के साथ घुल मिल गए। इतने सालों इकट्ठा रहने के कारण डॉ गुरप्रीत उस परिवार की सदस्य बन गई है।
रिश्ते में बैलेंस जरूरी
डॉ गुरप्रीत कौर कहती है कि एजूकेशन पूरी करने के बाद हम समाजसेवा से जुड़ गए। जहां तक इतने लंबे समय तक दोस्ती निभाने की बात है तो मेरा मानना है कि किसी भी रिश्ते में जब तक बैलेंस बना रहेगा, तब तक उस पर कोई आंच नहीं आ सकती। वहीं, डॉ वाजपेयी कहती है कि हमारी आपसी समझ ने दोस्ती और जिंदगी के बीच हमेशा बेहतर सामंजस्य स्थापित किया है। यही हमारी दोस्ती का राज है।
-1978 में पहली बार मिली थी दोनों
डॉ वाजपेयी ने बताया कि उनकी गुरप्रीत से पहली मुलाकात 1978 में गुरु नानक गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई, जहां दोनों ने ग्यारहवीं क्लास में एडमीशन लिया था। यहां से शुरू हुआ दोस्ती का सफर 38 साल बीत जाने के बाद भी जारी है। इन दोनों ने ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी साथ-साथ की। शादी के बाद एक समय लगा कि अब अलग हो जाएंगे, लेकिन संयोग बनते चले गए और हम कभी अलग नहीं हुए।