नियम 134-ए के तहत निजी स्कूलों में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा पास कर चुके बच्चों के हक के लिए अभिभावकों ने निजी स्कूलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीते दिनों बीईओ और फिर डीईओ से मिलने के बावजूद समाधान न होता देख अभिभावक स्कूल-स्कूल जाकर धरना-प्रदर्शन करने के लिए कमर कस ली है। इसकी शुरुआत शनिवार को अभिभावकों ने एक निजी स्कूल के बाहर धरना देकर की। इस दौरान उन्होंने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी कर रोष व्यक्त किया।
शनिवार सुबह करीब साढ़े दस बजे एक निजी स्कूल के बाहर दर्जनों अभिभावक हरियाणा अभिभावक मंच के बैनर तले एकत्रित हुए। यहां मंच के पदाधिकारियों और सदस्यों के साथ अभिभावकों ने दरी बिछाकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान विजयपाल सिंह ने कहा कि जिले में नियम 134-ए के तहत निजी स्कूलों में दाखिले के लिए करीब 1556 बच्चों ने प्रवेश परीक्षा दी। इनमें से 835 ने परीक्षा पास की है। विभाग की ओर से बच्चों को स्कूल अलॉट कर दिए गए हैं, लेकिन स्कूल बच्चों के दाखिले के लिए अभिभावकों के चक्कर कटवा रहे हैं। इसी से परेशान होकर अभिभावकों ने बच्चों के हक की लड़ाई लडने के लिए स्कूल-स्कूल जाकर एक-एक दिन का सांकेतिक धरना देने का फैसला लिया है। इसी के तहत पहले दिन एक निजी स्कूल के बाहर सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर करीब दो बजे तक धरना देकर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ रोष व्यक्त किया।
नियमों के विरुद्ध मांग रहे दस्तावेज
अभिभावक दीपक कुमार, संजीव कुमार, विजय, सतीश कुमार नागरा, सुरजीत कौर आदि ने कहा कि स्कूल नियम 134-ए के तहत बच्चों का दाखिला देने में आनाकानी कर अभिभावकों से बदसलूकी कर रहे हैं। वह जब बच्चों के दिखाले के लिए स्कूलों में जाते हैं तो उनको वेटिंग रूम में भी बैठनी नहीं दिया जाता है। वह स्कूलों के चक्कर काट थक चुके हैं, लेकिन स्कूल नियमों के विरुद्ध उन से 12 से 14 दस्तावेज मांग रहे हैं।
नहीं हो रही सुनवाई
अभिभावकों ने कहा कि वह इससे पहले बीईओ और फिर डीईओ कार्यालय जाकर अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई होती नजर नहीं आ रही है। इसका असर उनके बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा हैं, चूंकि स्कूलों में दाखिला ले चुके अन्य बच्चों का सिलेबस कवर हो जाएगा। जबकि 134-ए के तहत निजी स्कूलों में दाखिला लेने के इच्छुक उनके बच्चों को सिलेबस कवर करने में दिक्कतों से दो-चार होना पड़ेगा।
स्कूल ने कही हर माह 700 रुपये फंड देने की बात
धरने पर बैठी सरोज बाला ने कहा की उनके बच्चे ने परीक्षा पास की है। जब वह उसके दाखिले के लिए स्कूल गए तो उनसे हर माह 700 रुपये फंड के नाम पर देने की बात कही गई। इस पर उन्होंने प्रिंसिपल से मिलना चाहा तो मिलने नहीं दिया गया और कहा गया कि बच्चे को पढ़ना है तो यह पैसे देने ही होंगे। जबकि सरकार की ओर से ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई है।
लंबी है कागजी कार्रवाई
दर्शन सिंह ने कहा कि जब वह अपने बच्चे के दाखिले के लिए गए तो पहले उनसे किसी ने बात ही नहीं की। जैसे-तैसे कर बात हुई तो कागजी कार्रवाई इतनी बता दी गई कि पूरी ही न हो सके। घर के सभी सदस्यों की डिटेल आधार कार्ड, पेन कार्ड, बैंक की पासबुक से लेकर घर अपना है या किराये का, इसकी जानकारी भी देने को कहा जा रहा है। ऐसे में सरकार और प्रशासन को इस दिशा में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।