संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर की जम्मू कॉलोनी निवासी निर्मला यादव ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से न केवल अपनी जिंदगी बदली जा सकती है, बल्कि दूसरों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। पिछले 18 वर्षों में वे स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से करीब 300 महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ चुकी हैं।
निर्मला यादव बताती हैं कि उन्होंने शुरुआत अपने खाली समय का सदुपयोग करने और परिवार की आर्थिक मदद के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूह से जुड़कर की थी। समूह में रहते हुए उन्होंने घरेलू उद्योग से जुड़े कई कार्यों का प्रशिक्षण लिया। शुरुआत में उन्होंने इसे कुछ समय के लिए अपनाने की सोची थी, लेकिन धीरे-धीरे इस काम में उनकी रुचि बढ़ती गई।
इसके बाद उन्होंने इसे अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। करीब दस वर्षों तक उन्होंने विभिन्न घरेलू उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण लिया और लगातार मेहनत की। इस दौरान उन्होंने अचार, मुरब्बा, विभिन्न प्रकार की चटनियां, सिलाई-कढ़ाई, स्वेटर बुनाई सहित कई हुनर सीखे। अनुभव और आत्मविश्वास बढ़ने के बाद उन्होंने अपना स्वयं सहायता समूह शुरू किया। इसके बाद उनके प्रयासों महिलाओं का जुड़ाव लगातार बढ़ता गया।
वे बताती हैं कि करीब 300 महिलाओं ने उनके साथ काम किया और स्वरोजगार की राह पकड़ी। इनमें से कई महिलाएं आज अपने परिवार के साथ बड़े स्तर पर काम कर रही हैं और अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। वर्तमान में उनके दो स्वयं सहायता समूह संचालित हो रहे हैं, जिनमें करीब 55 महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं।
समूह की महिलाएं सिलाई-कढ़ाई के अलावा बच्चों के स्वेटर, जुराबें, टोपी, दस्ताने, सेमियां, पापड़ और अन्य घरेलू उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की बिक्री से महिलाओं को नियमित आय प्राप्त हो रही है। इससे वे न केवल परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदारी निभा रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर अलग पहचान पित कर रही हैं।
निर्मला का कहना है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। उनका उद्देश्य अधिक से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि हर महिला सम्मान के साथ अपने पैरों पर खड़ी हो सके।