संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। आज की नारी ने यह साबित कर दिया है कि वह केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं मिसाल कायम कर रही हैं। हरनौल गांव में मेघा महिला समूह से जुड़ी महिलाएं आत्मनिर्भरता की कहानी लिख रही हैं।
वर्ष 2019 में समूह से जुड़कर प्रधान मंदीप रानी ने डेयरी व्यवसाय को नई दिशा दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में एक पशु से काम की शुरुआत की थी, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण विस्तार संभव नहीं हो पा रहा था। वर्ष 2019 में मेघा महिला समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक और सामाजिक सहयोग मिला।
इसी बीच वर्ष 2022 में उनके पति अनिल शर्मा, जो एक निजी कंपनी में 15 वर्षों से कार्यरत थे, की नौकरी छूट गई। उसी वर्ष पिता रामपाल शर्मा के निधन से परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया। ऐसे कठिन समय में समूह ने संबल दिया। मंदीप रानी ने बताया कि वर्ष 2022 में समूह के माध्यम से दो लाख रुपये का ऋण लेकर डेयरी का विस्तार किया गया और चार गोवंशों से दोबारा शुरुआत की।
मेहनत और लगन के बल पर आज उनकी डेयरी में 9 गोवंश, 8 बछड़ियां, 1 भैंस और 1 कटड़ी सहित कुल 10 दुधारू पशु हैं। पति अनिल शर्मा ने भी पूरा सहयोग देते हुए गांव में ही डेयरी संचालन की जिम्मेदारी संभाली। इससे न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्च भी व्यवस्थित हो सके।
समूह की संरचना भी सशक्त है। प्रधान मंदीप रानी के साथ सचिव रजनी देवी, खजांची ममता तथा सदस्य इंद्रजीत, पूजा, सुनीता, सुषमा, दर्शनी, मीना और सलिंद्रो सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। सभी महिलाएं मिलकर पशुपालन के साथ-साथ एक-दूसरे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक दविंद्र शर्मा ने बताया कि जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार के नेतृत्व में मिशन की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक 46 हजार महिलाएं पोर्टल पर पंजीकरण करा चुकी हैं। इनमें से कई महिलाएं स्वयं का व्यवसाय शुरू कर परिवार और समाज दोनों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। मेघा महिला समूह की सफलता आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुकी है।