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Yamuna Nagar News: ट्रैक्टर की टक्कर से पैदल जा रही महिला मजदूर की मौत, बेटी बची

Fri, 13 Feb 2026 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़े मृतक के परिजन। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। ट्रैक्टर की टक्कर से पश्चिम बंगाल की एक महिला मजदूर की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब महिला अपने पति और एक साल की बेटी के साथ काम से लौटते हुए सड़क पार कर रही थी। दुर्घटना के बाद चालक ट्रैक्टर मौके पर छोड़कर भाग गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मृतका की पहचान लोकी (पत्नी बिस्टू दास) निवासी लोहाणडा थाना रायेवंश, जिला उत्तर दिनाजपुर (पश्चिम बंगाल) के रूप में हुई है। वह अपने परिवार के साथ औरंगाबाद में किराये पर रहकर मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रही थी। शिकायतकर्ता बिस्टू दास ने पुलिस को बताया कि बुधवार शाम वह अपनी पत्नी और एक साल की बेटी के साथ काम खत्म कर गांव औरंगाबाद लौट रहा था।
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जब वे हीरा फैक्टरी के पास सड़क पार कर रहे थे, तभी यमुनानगर की ओर से तेज गति और लापरवाही से आ रहे ट्रैक्टर ने उसकी पत्नी को सीधी टक्कर मार दी। उस समय लोकी अपनी मासूम बेटी को गोद में लिए हुए थी। टक्कर लगते ही वह सड़क पर गिर गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे के बाद चालक ट्रैक्टर मौके पर ही छोड़कर भाग गया।
बिस्टू दास ने ट्रैक्टर का नंबर नोट कर लिया और राहगीरों की मदद से तुरंत डायल-112 पर सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल महिला को सिविल अस्पताल यमुनानगर पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
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आखिरी सांस तक बेटी को सीने से लगाए रखा
सड़क हादसे में जान गंवाने वाली लोकी की मौत ने एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी। बुधवार शाम जब वह काम खत्म कर अपने पति बिस्टू दास और एक साल की मासूम बेटी के साथ घर लौट रही थी, तब शायद उसे अंदाजा भी नहीं था कि यह सफर आखिरी साबित होगा। वह अपनी नन्ही बच्ची को गोद में लिए सड़क पार कर रही थी और अगले ही पल तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उसकी जिंदगी छीन ली। सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि जिस मां ने आखिरी सांस तक अपनी बेटी को सीने से लगाए रखा, उसी बच्ची की आंखों के सामने उसका सहारा छिन गया। रोजी-रोटी की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर दूर हरियाणा आए इस परिवार के सपने पलभर में टूट गए। अब बिस्टू दास पर बेटी की परवरिश की जिम्मेदारी अकेले आ गई है। मजदूरी कररे गुजर-बसर करने वाला बिस्टू दास इंसाफ की उम्मीद में है।
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