यमुनानगर। 200 बेड का चार मंजिला विशाल अस्पताल। इसमें मरीजों के लिए असंख्य कमरे व डॉक्टरों के लिए केबिन हैं। यहां ट्रामा सेंटर है। चार-चार ऑप्रेशन थियेटर हैं। मरीजों के चौथे तल पर जाने और आने के लिए एक दर्जन से ज्यादा लिफ्ट लगी हैं। इतना सबकुछ है, लेकिन नहीं है तो वह आईसीयू।
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल डेढ़ साल से बिना आईसीयू के चल रहा है। आईसीयू न होने से मरीज परेशान हैं। अस्पताल में भर्ती मरीज की तबीयत थोड़ी सी खराब हुई नहीं की उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया जाता है।
जब तक मरीज पीजीआई पहुंचता है तब तक वह जान से हाथ धो बैठता है या फिर हालत इतनी खराब हो जाता है कि वहां के डॉक्टर भी जान बचने की कोई गारंटी नहीं दे पाते। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को सभी सुविधाएं देने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर आमजन पर पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में आईसीयू शुरू करने की प्रक्रिया चार माह पहले शुरू हुई थी, परंतु बात आगे नहीं बढ़ पाई। ऑप्रेशन थियेटर के सामने आईसीयू वार्ड बनाकर इसमें छह वेंटिलेटर रख दिए गए थे। तब से लेकर आज तक इस पर ताला लटका हुआ है। आईसीयू में रखे वेंटिलेटर चलाने के लिए फिजिशियन का होना जरूरी है।
परंतु स्वास्थ्य विभाग के पास दो साल से न तो फिजिशियन है और न ही अन्य स्टाफ। इसके अलावा इंटर्नविस्ट, मेडिकल ऑफसर, स्वीपर, चतुर्थ श्रेणी स्टाफ नहीं है। वहीं वेंटिलेटर के लिए सबसे जरूरी मल्टीपैरामीटर मॉनिटर, इंफ्लूजन पंप जैसे जरूरी उपकरणों के साथ-साथ इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां भी नहीं है।
आईसीयू के लिए पांच एनेस्थेटिस्ट व पांच ही मेडिकल ऑफिसर चाहिए जो नहीं हैं। स्टाफ की कमी को पूरा करना सरकार का काम है। वहीं वेंटिलेटर के लिए अन्य उपकरणों की डिमांड स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा मुख्यालय भेजी गई थी, लेकिन अभी तक वहां से कोई जवाब नहीं आया।
377 भर्ती मरीज पीजीआई हुए रेफर :
जिला नागरिक अस्पताल से रोजाना औसतन दो मरीजों को गंभीर हालत में पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया जाता है। इनमें कुछ गंभीर मरीज तो ऐसे होते हैं जिनका उपचार करना यहां कार्यरत डॉक्टरों के बस की भी बात नहीं होती। जिन्हें ओपीडी में चेकअप के दौरान ही रेफर कर दिया जाता है जबकि जो मरीज अस्पताल में भर्ती होते हैं उन्हें भी हालत खराब होने पर आईसीयू की सुविधा नहीं मिल रही। जनवरी से अक्तूबर तक 10 माह में जिला नागरिक अस्पताल में भर्ती 377 मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ में रेफर किया जा चुका है।
तीमारदार हो जाते हैं पीजीआई में परेशान:
गंभीर हालत में अस्पताल के डॉक्टर मरीजों को पीजीआई या फिर एमएम कॉलेज मुलाना में रेफर कर देते हैं। जीवन रक्षक उपकरण न होने से मरीजों की हालत बिगड़ती चली जाती है। इससे रेफर मरीजों के साथ-साथ उनके परिजनों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
क्योंकि कई दिनों तक उन्हें घर से दूर पीजीआई में रहना पड़ता है। जिससे लोगों का काम-धंधा तो छूटता ही है साथ ही वहां बार-बार चक्कर लगाने में भी परेशानी होती है। परंतु स्वास्थ्य विभाग को इससे कोई सरोकार नहीं है। अधिकारियों की लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ रही है।
स्टाफ के लिए लिखा हुआ है: नवजोत कौर
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. नवजोत कौर का कहना है कि आईसीयू को चलाने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। स्टाफ और डॉक्टरों के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा हुआ है। आईसीयू को शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है।
जिला नागरिक अस्पताल से रेफर मरीज:
माह रेफर मरीज
जनवरी 49
फरवरी 67
मार्च 42
अप्रैल 61
मई 25
जून 45
जुलाई 28
अगस्त 15
सितंबर 21
अक्तूबर 24