यमुनानगर। जब हौसले बुलंद हों तो एक साधारण गृहिणी भी सफलता के शिखर को छू सकती है। इसकी जीती-जागती मिसाल पेश की है धानूपुरा के नक्ष स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने। साल 2019 में एक छोटे से कदम से शुरू हुआ यह सफर आज क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।
करीब छह साल पहले पूनम एक साधारण गृहिणी थीं, जो आंगनबाड़ी की गतिविधियों में सक्रिय रहती थीं। खाना पकाने का शौक उन्हें हमेशा से था, लेकिन उसे व्यवसाय का रूप देने का रास्ता नक्ष स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद मिला। आज इस समूह में 10 महिलाएं शामिल हैं, जिनमें प्रधान पूनम, सचिव नीरू और खजांची सिमरन के साथ-साथ दीपा, रजनी, सोनिया, मुमताज, रीटा, रूचि और सुनीता कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं।
पूनम आज आम, नींबू, मिर्च, लहसुन, टींड, कटहल और डयू जैसे कई प्रकार के अचार तैयार करती हैं। इसके अलावा, उनके द्वारा बनाए गए आंवले और बेल के मुरब्बे की काफी मांग है। केवल अचार तक ही सीमित न रहकर चमरौड़ी में एक फास्टफूड की दुकान भी चला रही हैं। समूह की सचिव नीरू सिलाई-कढ़ाई के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं। वहीं दीपा समूह सखी के रूप में जल संरक्षण से जुड़ी हैं।
यह समूह रादौर ब्लॉक के क्लस्टर और आजीविका महिला ग्राम संगठन के अंतर्गत आता है। इस ग्राम संगठन में कुल 7 समूह और 80 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। पूनम और उनके समूह के उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए, उन्हें वर्ष 2025 में हिसार में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सीएम के कार्यक्रम में सम्मानित भी किया जा चुका है। यह पुरस्कार उनके संघर्ष और मेहनत का सबसे बड़ा प्रमाण है। संवाद
महिला अबला नहीं, सबला : पूनम
पूनम का मानना है कि आज भी महिलाओं को घर से बाहर निकलकर काम करने में कई सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन वे बड़े विश्वास के साथ कहती हैं कि अगर परिवार का सहयोग और साथ मिले, तो कोई भी महिला अबला नहीं रहेगी। महिलाएं किसी भी कार्य को करने से पीछे नहीं हटतीं, बस उन्हें थोड़े प्रोत्साहन और अवसर की तलाश होती है।