संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। यमुनानगर से कैथल तक सड़क को फोरलेन करने का कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद जग गई है। इसकी पहली प्रक्रिया में सड़क से चलने वाले वाहनों का वजन मापने का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है। हालांकि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुछ माह पहले पिहोवा से लेकर यमुनानगर तक सड़क को फोरलेन बनाने की घोषणा की थी।
अब बजट में इसे कैथल से यमुनानगर तक फोरलेन करने की घोषणा की गई है। यमुनानगर से कुरुक्षेत्र तक इस सड़क की कुल लंबाई 41.15 किलोमीटर है। इसमें से 20 किलोमीटर यमुनानगर व 21.15 किलोमीटर जिला कुरुक्षेत्र में पड़ती है। यमुनानगर में पड़ने वाली सड़क में से 4.18 किलोमीटर पहले से ही फोरलेन है।
इसी प्रकार कुरुक्षेत्र में पड़ने वाली उक्त सड़क में से 7.85 किलोमीटर फोरलेन है। शेष 29.12 किलोमीटर सड़क को फोरलेन करने का प्रस्ताव है। कुरुक्षेत्र से पिहोवा तक हिस्सा भी फोरलेन होगा। फिलहाल जो सड़क बनी है उसकी चौड़ाई 33 फीट है। फोरलेन बनने के बाद यह 55 फीट हो जाएगी।
यमुनानगर से कुरुक्षेत्र की तरफ सड़क पर रोजाना कितने वाहन चलते हैं, कितने टायर के हैं, कितने वजन के, किस तरह का सामान वाहनों में लोड है और यमुनानगर से जाने वाले वाहन कुरुक्षेत्र से आगे कौन से जिलों व राज्यों में जाते हैं इसका सर्वे किया जा चुका है। सर्वे में यह भी पता चला था कि सड़क से यमुनानगर व उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के वाहन भी माल ढुलाई में लगे हैं।
नई चौड़ी फोरलेन सड़क बनने से यात्रियों की यात्रा तेज, सुरक्षित और आरामदायक होगी। खासकर उत्तराखंड और हरिद्वार जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मार्ग सबसे सुविधाजनक और तेज रूट बन जाएगा। हरिद्वार धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से प्रतिदिन हजारों यात्री हरिद्वार की यात्रा करते हैं।
यमुनानगर-पिहोवा रोड के फोरलेन बनने के बाद न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि वाहनों की भीड़ और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से भी राहत मिलेगी। श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह मार्ग अधिक सुरक्षित और आरामदायक साबित होगा। यमुनानगर अपने लकड़ी उद्योग, पेपर मिल और अन्य औद्योगिक इकाइयों के लिए जाना जाता है।
पिहोवा और कुरुक्षेत्र कृषि और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। नई फोरलेन सड़क से इन क्षेत्रों में व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। वहीं माल ढुलाई तेज होगी, किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। उद्योगों को कच्चा माल लाने-ले जाने में समय और लागत दोनों में बचत होगी। यमुनानगर का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को आकर्षित करता है। इन स्थलों तक आने-जाने को आसान बनाएगा।