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Yamuna Nagar News: बारिश से मंडियों में भीगा गेहूं, हवाओं से पारा लुढ़का

Sat, 03 May 2025 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। मौसम ने वीरवार देर रात अचानक करवट ली और रातभर बारिश होती रही। इसके साथ ही तेज हवाएं भी चली जिससे मौसम सुहावना हो गया। मौसम में आए इस बदलाव से जहां लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिली, वहीं अनाज मंडियों में खुले आसमान के नीचे रखा करीब 4000 मीट्रिक टन (एमटी) गेहूं भीग गया।
हालांकि आढ़तियों की ओर से बोरियों को तिरपाल से ढका गया था, लेकिन यह सारे प्रबंध काम नहीं आए। तिरपाल के नीचे से बारिश का पानी बोरियों में रिसता रहा। शुक्रवार सुबह मजदूर बोरियों को बारिश के पानी से उठाते दिखे। मंडियों में चार हजार एमटी से ज्यादा गेहूं भीगी है।
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जिले में रातभर 17.4 एमएम बारिश हुई। मंडियों में अभी तक 297899 एमटी गेहूं की खरीद हुई है। इसमें से 259997 एमटी की उठान हो चुकी है। 87.28 प्रतिशत गेहूं उठ चुकी है।
मंडियों में अभी 37902 एमटी टन गेहूं बकाया है। अब ज्यादातर गेहूं मंडियों में शेड के नीचे लगाया जा रहा है। हालांकि तिरपाल से ढका होने के बावजूद खुले में रखी गेहूं भीग गई। गेहूं की बोरियों से लदे ट्रक भी अनाज मंडियों में शेड के नीचे खड़े दिखाई दिए। बारिश ने लोगों को गर्मी से बड़ी राहत दिलाई है।
जिले का अधिकतम तापमान सात डिग्री तक लुढ़क कर 29 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। कुछ दिनों से तापमान 36 डिग्री पर बना हुआ था। हालांकि गत सप्ताह अधिकतम तापमान 40 डिग्री को पार कर गया था। इससे लोगों को तेज धूप व लू के थपेड़ों का सामना करना पड़ा था। हल्की बूंदाबांदी व तेज हवाओं ने सुबह के समय लोगों को गुलाबी ठंड का एहसास कराया। दिनभर लोगों के एसी लगभग बंद रहे।
सड़कों के किनारे जमा बारिश का पानी

बारिश का पानी सड़कों किनारे जमा हो गया। साथ ही सड़कों पर भी कीचड़ होने से वाहन रेंगते दिखे जिससे जाम की स्थिति रही। सुबह के समय स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। विद्यार्थी भीगते हुए स्कूलों में पहुंचे। मौसम विभाग के अनुसार एक सप्ताह तक लोगों को गर्मी से ज्यादा जूझना नहीं पड़ेगा। इस दौरान बादल छाए रहेंगे। मंगलवार को फिर से बारिश होने के आसार हैं।
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वातावरण से छट गया धूल व भूसे का गुबार

जब से गेहूं कटाई शुरू हुई थी तब से वातावरण में धूल व भूसे का गुबार बना हुआ था। क्योंकि गेहूं कटाई के दौरान भूसे के महीन कण हवा में मिल जाते हैं। जो सांस के साथ लोगों के शरीर में प्रवेश कर रहे थे। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा था। बारिश होने से धूल व भूसे का गुबार छट गया है।
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