स्कूल में खराब टोंटियों को बदलते गोविंद सिंह भाटिया। स्वयं
जगाधरी। जल का कोई विकल्प नहीं है और न इसे कृत्रिम रूप से बनाया जा सकता है। ब्रह्मांड में केवल पृथ्वी ही ऐसा ग्रह है जिस पर पानी है। मानवीय कलापों के कारण भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। वहीं, शहर निवासी शिक्षाविद् एवं साहित्यकार गोबिंद सिंह भाटिया कई वर्षों से लोगों को जल संरक्षण के लिए जागरूक और प्रेरित कर रहे हैं। अपने इस कार्य के चलते वे लोगों में वाटर मैन के नाम से जाने जाते हैं। उनके काम के कारण जिला प्रशासन की ओर से 26 जनवरी को उन्हें वाटर मैन का प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। गोबिंद सिंह भाटिया अकसर सार्वजनिक स्थलों, धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम स्थलों के आसपास देखे जा सकते हैं। वे इन स्थानों पर हाथ में जल संरक्षण के बोर्ड, पोस्टर लेकर व टी-शर्ट पहन खड़े होकर लोगों को जल संरक्षण के लिए जागरूक करते हैं।
गोबिंद सिंह भाटिया राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रभारी व अंग्रेजी के प्राध्यापक हैं। शिक्षाविद् होने के साथ वे साहित्यकार व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। जो लोगों को पर्यावरण व जल संरक्षण के लिए जागरूक कर रहे हैं। गोबिंद सिंह भाटिया ने बताया कि बर्बादी के कारण लगातार भूजल स्तर गिर रहा है। हमारे जिले का रादौर खंड भूजल स्तर के मामले में रेड जोन श्रेणी में आ चुका है। इसके अलावा शहर में भी 25 वर्षों में भूजल स्तर कई फीट नीचे चला गया है। उन्होंने कहा कि यही हालात रहे तो वह दिन दूर नहीं जब पानी के लिए हाहाकार मच जाएगा।
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शिक्षण संस्थानों में चला रहे अभियान
गोबिंद सिंह भाटिया अपनी मुहिम के तहत जिले के तमाम सरकारी व निजी स्कूलों, कॉलेज व अन्य शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान चला हुए हैं। वे शिक्षण संस्थानों में पहुंचकर विद्यार्थियों के साथ अध्यापकों को भी जल संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे विद्यार्थियों को जल को व्यर्थ न बहाने व संरक्षण की शपथ दिलाते हैं। उनकी इस मुहिम का यह असर हुआ है कि स्कूल, कॉलेज के 500 से ज्यादा विद्यार्थी प्रेरित होकर इस काम में जुटे हैं।
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बना रखा है ड्रेस कोड
वाटर मैन गोबिंद सिंह भाटिया अपने इस कार्य के लिए इतने समर्पित हैं कि उन्होंने इसके लिए ड्रेस कोड भी रखा हुआ है। वे ड्यूटी सहित विभिन्न सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण के लिए प्रेरित करने वाली पंक्तियां लिखी टी-शर्ट पहनकर जाते हैं। इससे लोग आकर्षित होकर उनसे बात करते हैं और उन्हें जागरूक करते हैं। यही नहीं यदि उन्हें रास्ते में कहीं खुली या टूटी टोंटी (नल) दिख जाता है तो वे उसे ठीक करते हैं ताकि पानी व्यर्थ न बहे।
स्कूल में खराब टोंटियों को बदलते गोविंद सिंह भाटिया। स्वयं