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दहेज लोभी सास-सुसर को दो साल की कैद

Fri, 28 Mar 2014 12:50 AM IST
अमर उजाला यमुनानगर
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जगाधरी। दहेज प्रताड़ना के दोषी सास-ससुर को कोर्ट ने दो साल की कैद और चार हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला न्यायधीश इंदू बाला की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में लगभग आठ साल तक चली सुनवाई के दौरान 17 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सास-ससुर को दहेज प्रताड़ना का दोषी करार देते हुए फैसला सुना दिया।
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पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कैंप निवासी शोभा अरोड़ा की शादी नवंबर 2005 में सहारनुपर के पंजाबी बाग निवासी विवेक बहल से हुई थी। शादी में शोभा के परिजनों ने हैसियत के मुताबिक दान दहेज दिया था। शोभा के मुताबिक शादी के कुछ दिनों के बाद उसके ससुर सुरेंद्र बहल तथा सास अरुणा बहल ने उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। जिसके बारे में उसने अपने परिजनों को बताया। हालांकि उसके परिजनों ने कई बार उसके ससुर तथा सास की मांगों को पूरा भी किया। लेकिन उनकी मांगें बढ़ती चली गई। शोभा के मुताबिक पंचायती तौर पर मामले को सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन मामला नहीं सुलझा। शोभा ने अपनी सास तथा ससुर से तंग आकर फरवरी 2006 में मामले की शिकायत फरकपुर पुलिस को दी। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर उसके ससुर सुरेंद्र बहल तथा सास अरुणा बहल के खिलाफ भादंसं की धारा 498 ए तथा 406 के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हुई। वीरवार को न्यायधीश इंदू बाला ने शोभा की सास अरूणा बहल व ससुर सुरेंद्र मोहन बहल को दहेज प्रताड़ना का दोषी करार देते हुए अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने भादंसं की धारा 498ए में दो साल की सजा तथा 406 में एक-एक साल की सजा सुनाई है। जबकि दोनों पर दो-दो हजार रुपए जुर्माना भी किया है।
पांच साल पहले दंपति को किया था बेदखल
शोभा के मुताबिक करीब पांच साल पहले उसके ससुर सुरेंद्र बहल ने उसके पति विवेक बहल तथा उसे अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया था। करीब ढाई साल पहले उसके पति की मौत के बाद उसकी सास-ससुर ने उसे घर से निकाल दिया। जिसके बाद वह मायके आ गई। लेकिन उसने इस मामले में हार नहीं मानी और दहेज के लोभियों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखी। कोर्ट में 17 लोगों की गवाही को ध्यान में रखते हुए न्यायधीश इंदू बाला ने वीरवार को अपना फैसला सुनाया।
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