संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुमान्या भारती ने प्रवचन किया। साध्वी ने जीवन में गुरु कृपा का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि जब परमपिता परमात्मा साकार स्वरूप में धरती पर आते हैं, तो वह अपनी कृपा से संपूर्ण मानव जाति का कल्याण करते हैं। यदि मानव ही अपने संकीर्ण दृष्टिकोण के दायरे से बाहर निकलकर ईश्वर की कृपा का अनुभव न करना चाहे, तो स्वयं परमात्मा भी उसका उद्धार नहीं कर सकते हैं।
सत्संग का संदेश मिलना, पूर्ण संत की शरण में जाना, ब्रह्मज्ञान से जुड़ना और ध्यान साधना से परमात्मा के परम प्रकाश स्वरूप का दर्शन करना, इन दिव्य अनुभूतियों का आधार है। यह केवल गुरु कृपा से ही संभव हो सकता है साध्वी ने कहा कि मनुष्य के जीवन में बहुत से पड़ाव ऐसे आते हैं जब वह स्वयं को अकेला, निसहाय और बेबस खड़ा पाता है।
गुरुकृपा का आधार लिए बिना पुरुषार्थ का परिणाम क्षणिकभर सुख दायक तो हो सकता है लेकिन स्थायी नहीं हो सकता है। गुरुकृपा से प्राप्त सफलता चिरस्थायी एवं आनंददायक होती है। गुरु कृपा वह सुगंध है, जो मानव जीवन के हर कर्म को सुवासित करती है। गुरु कृपा से हर असंभव कार्य भी संभव हो जाता है।
शिष्य अपना मन, चित्त एवं बुद्धि गुरु को सौंप कर स्वयं प्रभु चिंतन से जुड़ जाए लेकिन इसका तात्पर्य ये कदापि नहीं है कि वह अपने पुरुषार्थ से मुख ही मोड़ लें। गुरु कृपा के अभाव में मनुष्य जन्म से मृत्यु पर्याप्त संसार में प्रेम, सम्मान, पद, प्रतिष्ठा, धन, वैभव पाने के लिए भटकता रहता है और वह मानव तन का परम लक्ष्य भूल जाता है।
संत नामदेव, गोस्वामी तुलसीदास, मीराबाई, सहजो बाई, स्वामी विवेकानंद, शिवाजी सैंकड़ों भक्त इतिहास में हैं, जिन्हें अपने गुरु कृपा से आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग प्राप्त हुआ है। जिससे उनका नाम इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो गया। इस दौरान साध्वियों ने भजनों से प्रभु व गुरु महिमा का गुणगान किया।