यमुनानगर। इस बार कपालमोचन मेले के दौरान भूमिगत जल दूषित हो जाएगा। इसके लिए कोई और नहीं बल्कि सरकारी विभाग जिम्मेदार है। दरअसल मेला क्षेत्र में बनने वाले 600 शौचालयों की गंदगी को जमीन में बोर कर नीचे डालने का डिजाइन बनाया गया है। इस डिजाइन के आधार पर ही 22 सितंबर को मेला क्षेत्र में शौचालय बनाने का टेंडर भी जारी कर दिया गया है। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि ये शौचालय बने तो जमीन के नीचे का पानी जहरीला हो जाएगा।
प्रसिद्ध प्राचीन तीर्थ स्थल कपालमोचन में हर साल मेला लगता है, जिसमेें पांच से आठ लाख श्रद्धालु आते हैं। इन श्रद्धालुओं के रहने के लिए करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में इंतजाम किए जाते हैं। श्रद्धालुओं के लिए सैकड़ों शौचालय भी बनाए जाते हैं। इस बार मेला प्रशासन ने 600 शौचालयों का टेंडर किया है। इस टेंडर में शौचालय के लिए जो डिजाइन तैयार किया गया है, उसके अनुसार छह इंच डाया का 10 से 15 फुट गहरा बोर किया जाएगा और शौचालय की सारी गंदगी इस बोर में सीधी डाल दी जाएगी। गौरतलब है कि कपालमोचन मेला क्षेत्र में कहीं कहीं भूमिगत जल 15 से 20 फुट नीचे है। मेला क्षेत्र में 600 शौचालय बनने हैं। इन शौचालयों का इस्तेमाल पांच से आठ लाख श्रद्धालु करेंगे। ऐसे 15 फुट गहराई का बोर करने पर भूमिगत जल प्रदूषित हो जाएगा। दिलचस्प यह है कि शौचालय का डिजाइन पब्लिक हेल्थ विभाग ने बनाया है। इंजीनियरिंग में महारत वाले इस विभाग के अधिकारियों को जमीन में बोर कर शौचालय की गंदगी डालने से होने वाले नुकसान का जरा भी ख्याल नहीं आया।
- मेला क्षेत्र में पहले बनते थे सैप्टिक टैंक
बीते सालों में मेला क्षेत्र में जो शौचालय बनाए जाते हैं। उनका डिजाइन अलग होता था। पिछले साल शौचालयों के लिए आठ फुट लंबे, चार फुट चौड़े व छह फुट गहरे सेप्टिक टैंक बनाए गए थे। इन टैंक में चिनाई कर ईंट बिछाई गई थी ताकि शौचालय की गंदगी जमीन के नीचे न जाए।
टेंडर फार्म में नहीं था शौचालय का डिजाइन
शौचालय के लिए साइट पर जो टेंडर फार्म जारी किए गए, उनमें शौचालयों का डिजाइन नहीं था। 22 सितंबर को ठेकेदार टेंडर के लिए आए तो अधिकारियों का ध्यान इस ओर दिलाया गया। इसके बाद डिजाइन ठेकेदार को मुहैया करवाया गया।
पीने लायक नहीं रहेगा भूमिगत पानी : पर्यावरणविद्
प्रदेश के जाने-माने पर्यावरणविद् व गुरुनानक खालसा कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल प्रोफेसर जगतार सिंह सोढी ने कहा कि यदि बोर कर शौचालयों की गंदगी जमीन में डाली गई तो मेला क्षेत्र और आसपास का भूमिगत जल प्रदूषित हो जाएगा और पीने योग्य नहीं रहेगा। शौचालय की गंदगी को सेप्टिक टैंक बनाकर उसमें स्टोर करना चाहिए।
वर्जन ::::::::
शौचालय का टेंडर हमने दिया है, लेकिन शौचालय का डिजाइन पब्लिक हेल्थ विभाग ने बनाया है जो कि गवर्नमेंट एजेंसी है। पब्लिक हेल्थ विभाग ने जो डिजाइन दिया, उसका ही टेंडर किया गया है।
नवीन आहूजा, मेला प्रशासक व एसडीएम बिलासपुर।
वर्जन :::::
शौचालय का डिजाइन पब्लिक हेल्थ ने बनाया है। हमने पहले बोर की गहराई 20 फुट रखी थी। जिसे कम कर 15 फुट किया गया है।
बीबी गुप्ता, एसडीओ, पब्लिक हेल्थ