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सात दिन बाद से नवरात्र, अबके भी न कुट्टू करे बीमार

Sat, 24 Sep 2016 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, यमुनानगर।
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यमुनानगर - फोटो : यमुनानगर
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यमुनानगर। आठ दिन बाद से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। इस दौरान व्रत रखने वालों के लिए आहार के रूप में कुट्टू का आटा थोक से फुटकर दुकानों तक पहुंचने को तैयार है। नवरात्र शुरू होते ही यह लोगों की थाली तक भी पहुंच जाएगा, किंतु इससे पहले असली-नकली का भेद नहीं खुल पाएगा। चूंकि विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है, जबकि बीते वर्षों में मिलावटी व जहरीला कुट्टू के आटे से फूड पॉयजनिंग के दर्जनों मामले सामने आए थे।
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बता दें कि नवरात्र में व्रत के दौरान आहार के रूप में बाजार में मुख्य रूप से कुट्टू व स्वांक के आटे व चावल और सेंधा नमक उपलब्ध होते हैं। इस बार एक अक्तूबर से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। यानी इसमें महज सात दिन ही बाकी हैं। इसको लेकर बाजार में कुट्टू का आटा थोक से फुटकर दुकानों तक पहुंचने लगा है। इसके असली या नकली होने का भेद खोलने के लिए सेंपलिंग की कार्रवाई होती है, जो पहले स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जाती थी, किंतु एक अप्रैल 2011 के बाद विभाग के अंतर्गत फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन को यह जिम्मा सौंप दिया गया। बीते वर्षों में नवरात्र के दिनों में कुट्टू के आटे के कहर के बावजूद विभाग सेंपलिंग के लिए नवरात्र शुरू होने का इंतजार कर रहा है।

2011 और 2012 में दर्जनों हुए थे बीमार
वर्ष 2011 और 2012 में नवरात्र के दौरान दर्जनों फूड पॉयजनिंग के मामले सामने आए थे। इसकी वजह चिकित्सकों द्वारा कुट्टू के आटे का जहरीला व मिलावटी होना बताया गया। अप्रैल 2011 में शिवपुरी बी निवासी राजेंद्र कुमार की पत्नी मीनू, कृष्णा कॉलोनी के सतविंद्र व उनका बेटा गुरप्रीत व अमनदीप, गोबिंदपुरी के संगीत, बिलासपुर में एक ही परिवार के पांच लोगों सीताराम व उनका बेटे पंकज, पुत्रवधु डिंपी, छोटे बेटे विकास और बेटी अंजलि को फूड पॉयजनिंग हुई।
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एक अधिकारी के पास दो जिले
जिले में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्टेशन के इंस्पेक्टर प्रेम सिंह हैं। सेंपलिंग में देरी की एक वजह यह भी है कि एक ही फूड इंस्पेक्टर पर दो जिलों का जिम्मा है। प्रेम सिंह यमुनानगर के अलावा वह हिसार में कार्यभार संभाले हुए हैं। जिले में हजारों खाद्य व पेय पदार्थों के प्रतिष्ठान हैं, जिनकी सेंपलिंग के लिए एक फूड इंस्पेक्टर पर्याप्त नहीं है। खाद्य एवं पेय पदार्थों के सेंपल भरने के बाद उन्हें चंडीगढ़ लैब भेजा जाता है, जहां से रिपोर्ट आने में ही कम से कम 15 दिन का समय लग जाता है। रिपोर्ट आने तक नवरात्र खत्म हो जाते हैं।

ऐसे करें पहचान:
विशेषज्ञों की मानें तो आटे में सेलखड़ी, ज्वार तथा कृत्रिम कलर का प्रयोग होता है। कुट्टू का आटा खरीदते समय सूंघकर देख लें कि उसमें किसी तरह की गंध तो नहीं आ रही। आटे को चखकर देख लें कि वह कड़वा तो नहीं। हाथ पर चुटकी भर आटे में पानी डालकर रगड़ कर देखें, यदि रंग मिला होगा तो पता चल जाएगा। कप में पानी भरकर उसमें एक चम्मच आटा डालें देखें कि कप की तलहटी में कुछ जम तो नहीं गया।
 
यह सही है कि सैंपलिंग की रिपोर्ट आने में 15 दिन लग जाते हैं। फूड इंस्पेक्टर से बात कर स्ट्रेटेजी बनाई जाएगी। इस बार नवरात्र से पहले सेंपलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
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शिवेंद्र सिंह, कार्यवाहक सिविल सर्जन, यमुनानगर।
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