तंबाकू का स्वाद और सिगरेट का कश मस्तिष्क को दो मिनट तो सुकुन देता है। लेकिन यह सुकुन सेहत पर बहुत भारी पड़ रहा है। इसके बदले में लोगों को सौगात के रूप में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी मिल रही है। तंबाकू से लोगों को मुंह, गला व फेफड़ों का कैंसर हो रहा। स्वास्थ्य विभाग की स्क्रीनिंग में यह सामने आया है। जांच में पता चला है कि कैंसर के कुल रोगियों में 25 प्रतिशत मरीज मुंह व गला तथा 10 प्रतिशत फेफड़ों के कैंसर के हैं। कैंसर की चपेट में शहर से ज्यादा गांव के लोग आ रहे हैं। इतनी घातक बीमारियां होने के बावजूद लोग तंबाकू, गुटका खाना नहीं छोड़ रहे।
स्वास्थ्य विभाग की स्क्रीनिंग में यह भी सामने आया है कि जिले में मुंह से ज्यादा गला के कैंसर रोगी ज्यादा मिल रहे हैं। ऐसा इसलिए कि यहां के लोग अन्य जिलों व प्रदेशों के मुकाबले तंबाकू कम खाते हैं जबकि सिगरेट ज्यादा पीते हैं। सिगरेट का धुंआ जब शरीर के अंदर जाता है तो वह सीधा असर गले पर डालता है। जबकि गुटका खाने से मुंह व जुबान का कैंसर लोगों को जकड़ रहा है।
लोग केवल घर, दुकान पर या गुपचुप तरीके से ही धूम्रपान नहीं कर रहे, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर भी बीड़ी, सिगरेट के कश लगाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एक साल में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों के कुल 1145 चालान किए गए हैं। साथ ही इन लोगों पर 40 हजार रुपये का जुर्माना भी किया गया है। अब स्वास्थ्य विभाग ने राजकीय स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के अलावा गांवों के सरपंचों को भी सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करने वालों के चालान करने की अनुमति दी है। धूम्रपान करने वालों पर 200 रुपये जुर्माना करने का प्रावधान है। वहीं शिक्षण संस्थानों के 100 वर्ग गज के आसपास तंबाकू व इससे बने उत्पादन बेचने पर पूरी तरह से पाबंदी है।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. बुलबुल ने बताया कि लोग तंबाकू छोड़ सके इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सालभर जागरुकता अभियान चलाया जाता है। 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर 11 स्कूलों के अलावा गुरु नानक खालसा कॉलेज में जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। वहीं 14 जून रोजाना कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को तंबाकू से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जाएगा। करीब 1145 चालान पिछले एक साल में विभाग ने किए हैं।