हरियाणा के यमुनानगर शहर के बीच बसी हाइडल कॉलोनी में बिजली कर्मियों के परिवारों को शुक्रवार की सुबह आंख खोलते ही घर से लेकर बाहर कॉलोनी में हर तरफ बाढ़ सा मंजर नजर आया। तीन से चार फीट पानी में घरों के अंदर राशन, सिलिंडर, फ्रिज, कुर्सियां व अन्य सामान तैरते दिखे।
बाहर खड़ी कारें व बाइकें भी पूरी तरह पानी में समाई दिखी। पहली बार ऐसी तस्वीर देख बच्चे व महिलाएं सहम गए। इन दौरान कुछ परिवार नींद में ही थे, गनीमत रही कि उन्हें पड़ोसियों ने फोन कर जगाया और घरों से बाहर निकलने के लिए कहा।
दरअसल, शहर और आसपास के क्षेत्रों में शुक्रवार की सुबह रिकार्ड बारिश हुई। इस दौरान शहर के बीच स्थित हाइडल कॉलोनी में सुबह पांच बजे दीवार तोड़ नाले का पानी लोगों के घरों में घुस गया। नींद खुलते ही पहले हर कोई घरों में रखे कीमती सामान को बचाने की जद्दोजहद में लग गया, पर पानी का स्तर कम होने के बजाय बढ़ता देख सभी खुद को बचाने के प्रयास में लग गए।
बिजली कर्मी अपने परिवारों के बच्चों व महिलाओं को ग्राउंड फ्लोर से फर्स्ट फ्लोर पर ले गए। फिर उन्हें बीएसएफ की मदद से कॉलोनी से बाहर निकाला गया। किंतु पानी में डूबने से घरों में राशन से लेकर फर्नीचर व अन्य सामान सहित बाहर बाइकें व कार खराब हो गए।
इस पर बिजली कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने हालात के लिए नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही उन्होंने बिजली निगम के अफसरों पर भी अनदेखी और फोन रिसीव नहीं करने के आरोप लगाए।
छुट्टी पर ना होता तो डूब जाते बच्चे
कॉलोनी के लोकेश ने बताया कि सुबह साढ़े चार बजे नींद खुली तो बारिश हो रही थी, पर घर में कोई पानी नहीं आया था, लेकिन पांच बजे अचानक दो फीट पानी घर में घुस आया। देखते ही देखते घर के अंदर पानी का स्तर लगातार बढ़ने लगा। चार व सात साल के बच्चे दोनों कमरे में सो रहे थे, जिन्हें जगाया और फर्स्ट फ्लोर पर ले गए। लोकेश ने बताया कि बच्चे को बुखार था, इसलिए वह छुट्टी लेकर घर पर था। अगर इस दौरान वह ड्यूटी पर होता तो दोनों छोटे बच्चे डूब भी सकते थे। अब कॉलोनी में भरे गंदे पानी से बीमारी फैलने का भी डर है और इसमें सांप व अन्य जहरीले जीवों का भी खतरा सता रहा है। इसलिए परिवारों को कॉलोनी से बाहर सुरक्षित स्थान पर ले गए हैं। इसी के चलते बच्चे स्कूल भी नहीं जा पाए हैं।
लाखों रुपये का नुकसान, हो भरपाई
संजीव कुमार व सतबीर सिंह ने कहा कि साथ लगते नगर निगम के नाले में पूरे शहर के पानी का फ्लो कॉलोनी के साथ होता है। नाले को काफी हद तक स्लैब डाल कवर कर दिया गया, जिसके बाद से यहां नाले में पानी का फ्लो तेज हुआ है। इससे कॉलोनी की कमजोर दीवार सुबह टूटी और अंदर तीन से चार फीट पानी भर गया। इतना भी समय नहीं था कि अपना सामान बचा सकें और सुबह जागते ही राशन, सिलेंडर, फ्रिज, कुर्सियां तैरते हुए और सोफा, बेड व अन्य फर्नीचर भी देखते ही देखते पूरी तरह डूब गए। इसमें टीवी, लैपटॉप सहित बच्चों की किताबें व जरूरी दस्तावेज भी खराब हो गए। बाहर पार्किंग में खड़ी कारें व बाइकें भी पूरी तरह पानी में डूबकर खराब हो गईं। इससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ है, इसलिए मांग है कि प्रशासन की ओर से इसका आकलन कर मुआवजा दिया जाए।
मौके पर टीम भेज जांच कराएंगे। अगर कहीं कमी पाई गई तो उसे दुरुस्त कराया जाएगा। बारिश के दौरान जलभराव से शहर को बचाने के लिए नगर निगम की टीमें फील्ड में हैं। जहां भी जलभराव होने का पता चलता है, वहां टीमें पंप सेट की मदद से पानी निकासी करवा रही हैं। साथ ही नालों की सफाई भी कराई जा रही है।
-आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।