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कोरोना में माता-पिता को खो चुके तीन बच्चों को मिली 10-10 लाख की आर्थिक सहायता

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Three children who lost their parents in Corona got financial assistance of Rs 10 lakh each - फोटो : Yamuna Nagar
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यमुनानगर। कोरोना काल में अपने माता-पिता को खो चुके जिले के तीन बच्चों रानी, तान्या व अजय को पीएम केयर फॉर चिल्ड्रन स्कीम के तहत 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। उनके खाते में डाली यह राशि वह 23 साल की आयु पूरी होने के बाद निकाल सकेंगे। जबकि 18 की उम्र के बाद रकम का ब्याज 5500 रुपये प्रति माह मिलेगा।
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तीनों बच्चों को सचिवालय के सभागार में स्कीम के तहत मिलने वाले लाभ की डीसी पार्थ गुप्ता, यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, रादौर विधायक डॉ. बीएल सैनी ने किटें भेंट कीं। स्कीम के तहत बच्चों को दी गई राशि का गार्डनियर डीसी को बनाया गया है। डीसी पार्थ गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पीएम केयर फॉर चिल्ड्रन स्कीम के तहत मिलने वाले लाभ से बच्चों का भविष्य उज्जवल बन सकेंगा। शिक्षा के माध्यम से भी बच्चे सशक्त बन सकेंगे। मौके पर बाल कल्याण समिति की चेयरपर्सन प्रीति जौहर, सदस्या अल्का गर्ग, रेणू रानी व पवन बटार, सचिन गोयल व शालिनी शर्मा, पीओ बलजीत कौर, डीसीपीओ आंचल, बालकुज इंचार्ज राजिंद्र बहल, प्रीति, रंजन शर्मा मौजूद रहे।
हर माह चार हजार रुपये, 20 व 50 हजार की छात्रवृत्ति
डीसी ने बताया कि जो बच्चा परिवार के साथ रह रहा है, उसे प्रति माह चार हजार रुपये स्कीम के तहत दिए जाएंगे। साथ ही शिक्षा के लिए 20 हजार रुपये की छात्रवृति और तकनीकि शिक्षा प्राप्त करने के लिए 50 हजार रुपये की छात्रवृति दी जाएगी। यदि कोई बच्चा उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहता है तो उसे शिक्षा लोन दिलाया जाएगा और लोन का ब्याज सरकार वहन करेगी। उन्होंने बताया कि बच्चों की यूनिफॉर्म, पाठ्य पुस्तकें व कॉपी भी सरकार मुहैया कराएगी। इन बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए इन्हें इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड भी दिया है। कार्ड के तहत बच्चे पांच लाख रुपये तक का इलाज करवा सकेंगे।
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बच्चों के संपर्क में रहें महिला एवं बाल विकास अधिकारी
डीसी ने बच्चों से कहा कि कोई दिक्कत आती है तो महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें। महिला एवं बाल विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि बच्चों के संपर्क में रहे। विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने भी महिला एवं बाल विकास अधिकारी को सुझाव दिया कि व्यक्तिगत तौर पर इनसे मिलें, यदि कोई जिला प्रशासन के सहयोग की बच्चों को जरूरत हो तो उन्हें मुहैया कराएं।
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