यमुनानगर। सिंचाई विभाग ने पश्चिमी यमुना नहर की क्षमता बढ़ाने की योजना तैयार की है। हथिनीकुंड बैराज से दादूपुर हेड तक करीब 21 किलोमीटर लंबे हिस्से की क्षमता 16 हजार क्यूसेक से बढ़ाकर 24 हजार क्यूसेक की जाएगी। इस परियोजना पर विश्व बैंक के सहयोग से काम किया जाएगा।
एस्टीमेट तैयार होने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। नहर की क्षमता बढ़ने से जरूरत के अनुसार हथिनीकुंड बैराज से पश्चिमी यमुना नहर में अधिक पानी लिया जा सकेगा। इससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। नहर पर निर्भर किसानों और अन्य उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, पानी की वास्तविक उपलब्धता बैराज में पानी की मात्रा और निर्धारित आवंटन पर निर्भर करेगी। हथिनीकुंड बैराज हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। यहां से पश्चिमी यमुना नहर हरियाणा की ओर और पूर्वी यमुना नहर उत्तर प्रदेश की ओर जाती है। इसके अलावा यमुना नदी का प्रवाह भी बैराज से आगे बढ़ता है।
पश्चिमी यमुना नहर के माध्यम से हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों तक सिंचाई व पीने के लिए पानी पहुंचाया जाता है। विभाग की योजना के अनुसार हथिनीकुंड बैराज से दादूपुर हेड तक नहर की क्षमता बढ़ने से अधिक मात्रा में पानी प्रवाहित करने का रास्ता तैयार होगा। इससे मांग के अनुसार जलापूर्ति करने में सुविधा मिल सकती है। संवाद
सात जिलों को सिंचाई में होगा लाभ
पश्चिमी यमुना नहर हरियाणा के भिवानी, हिसार, जींद, रोहतक, सोनीपत, करनाल और अंबाला सहित विभिन्न जिलों की सिंचाई व्यवस्था में अहम भूमिका निभाती है। इसके जरिये हथिनीकुंड बैराज का पानी हरियाणा के विभिन्न हिस्सों से होकर दिल्ली की ओर भी जाता है। नहर की कुल जल वितरण व्यवस्था में क्षमता बढ़ाने की यह योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्षमता बढ़ने से मिलेगा ज्यादा पानी : एक्सईएन
सिंचाई विभाग दादूपुर हेड के एक्सईएन विजय गर्ग ने बताया कि भविष्य में पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए हथिनीकुंड बैराज से दादूपुर हेड तक पश्चिमी यमुना नहर की क्षमता बढ़ाई जानी है। परियोजना विश्व बैंक के सहयोग से पूरी की जाएगी। इस योजना पर काम तेजी से चल रहा है।