यमुनानगर। गांव चनेटी में बने हरियाणा के पहले बौद्ध स्तूप का अस्तित्व खतरे में है। पुरातत्व विभाग की लापरवाही से इसकी दीवारें दरकने लगी हैं। पांच साल से अधिक समय से विभाग इसकी दशा सुधारने के दावे करता आ रहा है। गोल आकार में ईंटाें से बना यह विशालकाय टीला दूर से देखने में जितना सुंदर लगता है, वहीं नजदीक आकर इसकी दशा को देखकर हैरानी भी होती है।
बौद्ध स्तूप पर असुविधाएं होने पर पर्यटकों की कमी लगातार घटती जा रही है। उत्तर भारत में इस प्रकार का पूर्ण बौद्ध स्तूप नहीं है, इसलिए यहां विदेशों से भिक्षु व पांवटा साहिब, मंसूरी, देहरादून आदि जगहों से लोग पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं। मौर्य राजा अशोक ने 2300 साल यह बौद्ध स्तूप बनवाया था। इतना ही नहीं 2010 में नई दिल्ली एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) ने इसका नवीनीकरण किया था। उस समय काफी सारे प्रश्न चिन्ह लगे थे।
करीब एक साल पहले पुरातत्व विभाग ने यहां का सर्वे किया था। तब यहां जो-जो असुविधाएं थी उनकी रिपोर्ट तैयार की थी। लेकिन ढील के चलते मिलने वाली सुविधाएं बीच में लटक गई। बौद्ध स्तूप ऐतिहासिक धरोहर होने के चलते यहां पीने के पानी की समस्या, शौचालय, इंफॉर्मेशन रूम आदि की व्यवस्था पर्यटकों को काफी खल रही है।
इंटक को कनवीनर सिद्धार्थ गौरी बताते हैं यह बौद्ध स्तूप काफी प्राचीन है। इससे बौद्ध धर्म के अनुनाइयों की आस्था जुड़ी है, लेकिन असुविधाएं होने पर पर्यटकों की संख्या घट रही है। वैसे तो बौद्ध स्तूप के चारों तरफ बाउंड्री वॉल बनी है। इसी के बीच में तोरण (द्वार) बना हुआ है। यही मुख्य रास्ता जिससे लोग बौद्ध स्तूप तक सीधे आ सकते हैं, लेकिन वह भी बंद पड़ा है। संवाद
स्तूप 100 मीटर की परिधि में बना
गांव चनेटी की दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगभग 100 मीटर की परिधि में एक 20 मीटर के दायरे वाला ईंटों का विशाल टीला है। इसकी ऊंचाई 8 मीटर है। यह स्तूप नीचे से गोल और चौड़ा है। ऊपर की तरफ पतला (भीड़ा) होता जाता है। इस स्तूप के चारों तरफ 4 फीट की ऊंचाई पर चारों तरफ जीने (पौड़ियां) हैं। इस स्तूप में पीली और पक्की ईंटें लगी हुई हैं। यह बौद्ध स्तूप 10 कनाल में है। इस स्तूप के चारों तरफ पौड़ियों के लेवल पर 5 फीट का चबूतरा घेरे नुमा है। यहां से गए हुए अवशेष गुरुकुल झज्जर में आज भी मौजूद हैं।
हम यहां के हालात को लेकर गंभीर है। जो भी असुविधाएं हैं, वह जल्द दूर कर ली जाएंगी। इस दिशा में हम लगातार कार्य कर रहे हैं। - डॉ. बनानी भट्टाचार्य, डिप्टी डायरेक्टर, पुरातत्व विभाग।