छछरौली। चौ. सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र बनसंतौर में रह रही चार हथिनियों को जंगली हाथियों से बचाने के लिए वन्य प्राणी जीव विभाग चहारदीवारी बनाने की तैयारी कर रहा है। केंद्र की चहारदीवारी को लेकर विभाग की तरफ से मुख्यालय में प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही बजट पास होने पर वॉल को बनाने का कार्य शुरू हो जाएगा।
चहारदीवारी बनने जंगल से आने वाले हाथी पुनर्वास केंद्र में घुस नहीं पाएंगे। हालांकि इस प्रकार की अभी कोई घटना सामने नहीं आई है, लेकिन कलेसर जंगल नजदीक होने के चलते कई बार हाथी बाहर सड़क पर आ जाते हैं। इसी को देखते हुए 84 एकड़ में फैली इस पूरी जगह को बाउंड्री वॉल बनाकर कवर किया जाएगा।
मौजूदा समय में पुनर्वास केंद्र में चंचल, लिली, लक्ष्मी-वन व लक्ष्मी-टू चार हथिनियां हैं। जिन्हें अलग-अलग जगहों से रेस्क्यू कर उनकी देखभाल के लिए यहां रखा गया है। इनमें सबसे उम्रदराज हथिनी चंचल है जोकि 82 साल की है। हाथी पुनर्वास केंद्र के चारों तरफ कांटेदार तार लगी हुई है, लेकिन वह नाकाफी है। दूसरा यहां पर महावतों के क्वार्टर, स्टाॅफ व विभाग का दफ्तर भी बने हैं।
ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि को देखते हुए 84 एकड़ में पत्थरों के साथ मजबूत दीवार बनाने का प्लान है। जिसका प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा जा चुका है। उल्लेखनीय है वर्ष 2008 में लगभग एक करोड़ की लागत से 50 एकड़ जमीन पर चौ. सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र (एलिफेंट सेंटर) की स्थापना की गई।
सन 2008 घरौंडा से बिना परमिट मिले दो मादा हथिनियों लक्ष्मी व चंचल को काबू कर बनसंतौर छोड़ा गया था। एक हथिनी लिली को सिरसा चुनाव के दौरान बीएसपी के एक प्रत्याशी के जुलूस से काबू कर बनसंतौर केंद्र पर छोड़ा गया था। इसी तरह हथिनी लक्ष्मी टू को दिल्ली सरकार के माध्यम से बनसंतौर में भेजा गया था। संवाद
पुनर्वास केंद्र की बाउंड्री वॉल का प्रस्ताव भेजा हुआ है। अगस्त माह में बजट मिलने की उम्मीद है। मंजूरी मिलते ही वॉल को बनाने का कार्य शुरू किया जाएगा। वहीं बाउंड्री वॉल बनने के बाद केंद्र के अंदर सिक्योरिटी बनी रहेगी। - लीलूराम, इंस्पेक्टर, वन्य प्राणी विभाग यमुनानगर।