यमुनानगर। सरस्वती नदी की धारा प्रदेश की डार्क जोन्स का जल्द ही पूरी तरह से खात्मा कर देगी। जहां धारा के प्रवाहित होते ही सूखा क्षेत्रों की समस्या दूर हो जाएगी, वहीं जलस्तर नीचे जाने से ठप पड़े नलकूपों में भी जान आ जाएगी।
रादौर से कैथल के बीच सरस्वती के पैलियो चैनल्स पर बहने वाला पानी संकेत दे रहा है कि प्रदेश के डार्क जोन में भूजल का स्तर बढ़ेगा। थानेसर, लाडवा व पिहोवा क्षेत्र ऐसे हैं जहां किसान भूजल स्तर सामान्य से बहुत कम होने की वजह से नए नलकूप तक नहीं लगा सकते हैं, उन क्षेत्रों में पिछले एक महीने से सरस्वती नदी के पैलियो चैनल्स में करीब 180 किलोमीटर क्षेत्र तक पानी बह रहा है तथा आने वाले दिनों में बिलासपुर स्थित आदिबद्री से रादौर के नदी के चैनल्स में भी पानी बहना शुरू हो जाएगा। इससे जहां किसानों को पानी की कमी नहीं खलेगी, वहीं खेत भी खूब हरे भरे दिखाई देंगे। चूंकि अकसर किसानों को धान (जीरी) के सीजन में सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है। उस दौरान गर्मी का मौसम होने के चलते खेत की मिट्ठी तापमान के बढ़ने से खुसक हो जाती है जिसके चलते भूमि में पानी का स्तर भी काफी हो जाता है, किंतु सरस्वती नदी की धरा पूरी तरह से प्रवाहित होने से भूजल का स्तर बढ़ जाएगा।
सरस्वदी नदी ने जीवंत होने के मिले संकेत
हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच ने बताया कि हाल ही में उन्होंने टीम के साथ रादौर से कैथल तक दौरा किया था। इस दौरान सरस्वती नदी ने जीवंत होने के संकेत मिले हैं। पाया कि रादौर से कैथल तक क्षेत्र में बने सरस्वती नदी के पैलियो चैनल्स पर एक महीने से पानी बह रहा है। आदिबद्री से रादौर तक का सिर्फ कुछ हिस्सा है उसमें भी जल्द ही नदी बहने लगेगी। आदिबद्री बांध का प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद सरस्वती नदी आदिबद्री से पंजाब की सीमा कैथल तक नियमित तौर पर बहा करेगी। इससे डार्क जोन्स भी पानी से लबालब होंगे।
पता चला है लाडवा क्षेत्र भी डार्क जोन में है, जहां के किसान भूजल स्तर खराब होने की वजह से नए ट्यूबवेल तक नहीं लगा सकते हैं। पुराने ट्यूबवेल जलस्तर प्रभावित होने की वजह से काम नहीं कर रहे हैं। पांच सप्ताह से नदी में पानी बहने की वजह से कई बंद ट्यूबवेलों ने काम करना शुरू कर दिया है। ऐसे में किसानों को नया ट्यूबवेल लगाने की नौबत नहीं आएगी। पुराने ही नलकूप भूजल स्तर बढ़ने के बाद भरपूर पानी देंगे।