संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नगर निगम गठन के बाद शहर की तीसरी सरकार चुनने के लिए दो मार्च को मतदान होना है। धीरे-धीरे माहौल चुनावी होने लगा। इसके साथ ही यमुनानगर और जगाधरी शहर के इतिहास को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई।
बर्तन नगरी के नाम से विख्यात जगाधरी का इतिहास काफी समृद्ध रहा है। यमुनानगर शहर ने भी समय के साथ कई बदलाव देखे हैं। इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो प्लाईवुड नगरी यमुनानगर ने तेजी से विकास के पथ पर कदम बढ़ाएं हैं। समय के साथ जगाधरी की पहचान धुंधली होती चली गई।
जगाधरी शहर का इतिहास ब्रिटिश काल से भी पुराना माना जाता है। बताया जाता है कि वर्ष 1739 के आस-पास जगाधरी शहर बसा था। जगाधरी को असली पहचान अंग्रेजी शासनकाल में मिली थी। वर्ष 1867 में जगाधरी नगर पालिका का गठन हुआ था। 1905 में जगाधरी नगर पालिका की बिल्डिंग बनी थी। इसके बाद जगाधरी को नगर परिषद का दर्जा मिला था। यह शहर अपने बर्तन बाजार को लेकर विश्व में अपनी पहचान रखता है।
जिस समय जगाधरी शहर तरक्की के कीर्तिमान स्थापित कर रहा था उस समय यमुनानगर के स्थान पर अब्दुल्लापुर नाम का गांव था। आजादी के आंदोलन के समय वर्ष 1942 में अब्दुलापुर गांव को नगर पालिका का दर्जा दिया गया था। इसके बाद 1954 में नगर परिषद में अपग्रेड कर दिया गया था।
आजादी के बाद अब्दुल्लापुर का नाम बदलकर यमुनानगर बना दिया है। जिसके बाद यमुनानगर विकास के मामले में जगाधरी से आगे निकल गया। हर जगह जगाधरी से पहले यमुनानगर का नाम आता है। यहां तक की वर्ष 1989 अंबाला जिले से अलग कर नए जिले का गठन हुआ तो उसका नाम भी यमुनानगर की रखा गया।