रादौर। शहर के खेड़ा मोहल्ले में चल रही आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया। कथावाचक साध्वी आत्मानंद पुरी ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताया।
उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से भगवान से सीधा जुड़ने का अवसर मिलता है। श्रीमद्भागवत श्रीकृष्ण के श्रीमुख से निकली है। श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि साक्षात श्रीकृष्ण का स्वरूप व मोक्ष का मार्ग है। इसके श्रवण से मन निर्मल होता है, जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं, जीव को संसार के मोह-माया से मुक्त होकर परमेश्वर की भक्ति प्राप्त होती है।
श्रीमद्भागवत कथा का मुख्य उद्देश्य भागवत कथा का मूल उद्देश्य मनुष्य को परमपिता परमात्मा से जोड़ना है। यह हमें संसार से भागना नहीं, बल्कि सांसारिक कर्तव्यों का पालन करते हुए ईश्वर की भक्ति में लीन रहना सिखाती है। कथा समापन पर भंडारा करवाया गया। इसमें श्रद्वालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। लोगों ने कथावाचक साध्वी आत्मानंद पुरी को सम्मानित किया।