संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रूचि पैदा व उनमें अविष्कारक गुण उत्पन्न करने के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रही इंस्पायर योजना का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। यह योजना केवल ऑनलाइन है। इससे योजना का मकसद पूरा नहीं हो पा रहा है। इंस्पायर योजना के तहत विद्यार्थियों के बनाए मॉडल की प्रदर्शनी भी ऑनलाइन होती है। विद्यार्थियों को आइडिया भी ऑनलाइन ही देने होते हैं। जब तक विद्यार्थी सहपाठियों के प्रयासों व क्रियाओं के बारे नहीं जानेंगे, तब तक वे इंस्पायर नहीं हो सकते हैं। विद्यार्थी इंस्पायर के जो मॉडल बनाते हैं, वह ऑनलाइन ही जांचे जाते हैं और निरीक्षण व आगामी स्तर के लिए चयन भी ऑनलाइन प्रक्रिया से ही किया जाता है।
खंड या जिलास्तर पर कोई प्रदर्शनी नहीं लगाई जाती है, जिसे देखकर अन्य विद्यार्थियों को इसके लिए प्रेरित किया जा सके। शिक्षकों का कहना है कि यदि स्कूल, खंड व जिलास्तर पर मॉडल की प्रदर्शनी होती है तो इसे देखकर विद्यार्थी प्रेरित होंगे। पहले 2012-13 तक यह ऑफलाइन होती थी और इसकी प्रदर्शनी लगाई जाती थी। इसे विद्यार्थी विभिन्न तरीके आइडिया लेकर आवेदन भी करते थे। वहीं दूसरी तरफ विभाग की ओर से हर साल इंस्पायर योजना के आवेदन में दस प्रतिशत का इजाफा करने का लक्ष्य रखा है। विभाग की ओर से डीएसएस सहित अन्य विज्ञान अध्यापकों की इसके लिए ड्यूटी लगाई जाती है। विद्यार्थियों को बताने के लिए अध्यापकों के पास केवल मौखिक जरिया है।
इस बार जिले से 618 विद्यार्थियों ने अपने आइडिया भेजे थे। इनमें से 37 विद्यार्थियों के आइडिया का चयन किया गया है। इन विद्यार्थियों को मॉडल बनाने के लिए दस हजार रुपये सहायता राशि दी गई है। इसके बाद यह प्रदेश स्तर पर चयनित होने वाले विद्यार्थी राष्ट्रस्तर पर प्रदर्शन करेंगे। वहीं पिछले साल 800 से ज्यादा आवेदन हुए थे। योजना की सभी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित होती हैं।
इंस्पायर योजना पूरी तरह से ऑनलाइन है। करीब 12 साल पहले यह ऑफलाइन होती थी। जिसके लिए बजट मिलता था और माॅडलाें की प्रदर्शनी लगाई जाती थी। प्रदर्शनी लगने से विद्यार्थी ज्यादा प्रेरित होते हैं। - विशाल सिंघल, जिला विज्ञान विशेषज्ञ।