संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एक ओर नगर निगम स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियों को लेकर दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर की सड़कों, गलियों और कॉलोनियों में फैली गंदगी इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। पिछली बार स्वच्छता के मामले में देश के टॉप-50 शहरों में शामिल यमुनानगर की स्थिति इस बार चिंताजनक दिखाई दे रही है।
शहर के कई इलाकों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जिससे लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि घरों से कचरा उठाने वाले टिपर समय पर नहीं पहुंच रहे हैं। मजबूरी में लोग खाली प्लॉटों और सड़क किनारे कचरा फेंक रहे हैं, जिससे बदबू के साथ-साथ मच्छरों और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। कॉलोनियों के खाली प्लॉट कूड़ाघर में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन इस ओर नगर निगम का ध्यान नहीं जा रहा।
पुराना हमीदा आनंद कॉलोनी के कंवरपाल सिंह ने बताया कि स्वच्छ सर्वेक्षण में टॉप पर आने के लिए नगर निगम को चाहिए कि सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि शहर को साफ सुथरा रखा जा सके। हालांकि नगर निगम सफाई व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए भरसक प्रयास कर रहा है
आदर्श नगर के नरेंद्र शर्मा ने कहा कि घर-घर जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए और नियमों का पालन सख्ती से कराया जाना चाहिए। वार्ड के लोगों को नागरिकों की शिकायतों का त्वरित समाधान के लिए ऐप का प्रयोग करना चाहिए और लोगों में भी वार्ड के हिसाब से सफाई निरीक्षक होना चाहिए ताकि सफाई कर्मचारी समय पर गांव, शहर और कॉलोनियों की सफाई कर सकें।
कैंप के कृष्णा नगर निवासी प्रमोद कांबोज ने स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग केवल प्रचार से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ईमानदार प्रयासों से ही संभव है। यदि नगर निगम नागरिकों को साथ लेकर लगातार काम करे, तो शहर न केवल सर्वेक्षण में आगे आएगा, बल्कि रहने के लिए भी बेहतर बनेगा।
शक्ति नगर में वेंडिंग जोन के बाहर लगा कचरे का ढेर। संवाद
शक्ति नगर में वेंडिंग जोन के बाहर लगा कचरे का ढेर। संवाद