संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। शिवालिक की पहाड़ियों में स्थित सतकुंभा मंदिर में बालू पत्थर से बने पंचमुखी विलक्षण शिवलिंग का पूजन व जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में शिवभक्त वहां पहुंचे। फाल्गुनी अमावस्या यानि वीरवार को यहां मेले का आयोजन किया गया। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने पंचमुखी शिवलिंग स्थापित किया था।
इसी जगह पर मौजूद बावड़ी की सप्त धाराओं में स्नान करके पांडवों को महाभारत युद्ध में निर्दोष लोगों के वध की आत्मग्लानि से मुक्ति मिली थी। भगवान शिव, महर्षि वेद व्यास के अलावा महाभारत से भी संबंधित इस मंदिर को जाने का रास्ता कठिन होने के बावजूद शिवभक्तों की आस्था में कोई कमी नजर नहीं आई।
शिवभक्तों ने जलाभिषेक करने के अलावा बावड़ी की सप्त धाराओं में स्नान भी किया। इस दौरान मंदिर परिसर में विशेष सजावट की हुई थी। महादेव सतकुंभा ट्रस्ट के प्रधान रमेश उर्फ बिट्टू ने बताया कि शिवभक्तों लिए यहां भंडारे व जलपान की व्यवस्था की गई। फूल कुमार गलौड़ी व पानीपत के कृष्ण लाल छौक्कर ने भजनों के माध्यम से भगवान शिव का गुणगान किया।
मंदिर के महंत सत्यस्वरूप ने बताया कि फाल्गुनी अमावस्या को ही पांचों पांडव सतकुंभा पहुंचे थे। यहां स्थित सप्त धाराओं में स्नान करके युद्ध की आत्मग्लानि से मुक्त हुए थे। मेले की व्यवस्था बनाए रखने में नारायणगढ़ के मनीष के अलावा झंडा के रणजीत सिंह, मान सिंह, नरेश व राजेश का भी सहयोग रहा।