संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिला नागरिक अस्पताल में कई दिन से अस्पताल में आने वाले मरीजों के हेपेटाइटिस बी व सी, गठिया तक के टेस्ट नहीं हो रहे हैं। मरीजों को यह टेस्ट कराने के लिए निजी लैब में जाना पड़ रहा है। वहां पर टेस्ट के लिए लैब संचालक लोगों से अलग-अलग कीमत वसूल रहे हैं।
अस्पताल में हेपेटाइटिस बी व सी, गठिया के करीब दो से ढाई हजार टेस्ट हर माह होते हैं। टेस्ट करने के लिए किट दो-तीन सप्ताह से खत्म है। टेस्ट किट न होने से मरीजों को बाहर से टेस्ट कराने को कहा जा रहा है। हेपेटाइटिस बी व सी व पीटी-आईएनआर टेस्ट मरीज के लिए बहुत जरूरी हैं। किसी भी तरह का ऑपरेशन करने से पहले डॉक्टर मरीज का यह टेस्ट जरूर करवाते हैं।
इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही डॉक्टर सर्जरी करने या नहीं करने का निर्णय लेते हैं। अस्पताल की लैब में यह सामान न होने से मरीजों को प्राइवेट लैब में भेजा जा रहा है। इन टेस्ट के लैब संचालक 150 रुपये से 250 रुपये तक वसूल रहे हैं। हेपेटाइटिस-बी रक्त और कुछ शारीरिक तरल पदार्थों के माध्यम से फैलता है।
अधिकांश लोगों को जन्म के समय या बचपन में हेपेटाइटिस बी हो जाता है। हेपेटाइटिस-सी रक्त के माध्यम से फैलता है। इसी तरह गठिया की समस्या कुछ दशकों पहले तक उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी बनी हुई थी, हालांकि अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार होते जा रहे हैं। गठिया को आर्थराइटिस भी कहा जाता है, इसके कारण जोड़ों में सूजन, दर्द, अकड़न की दिक्कत होने लगती है।
पीटी-आईएनआर मशीन पांच माह से खराब
डॉक्टर सर्जरी से पहले यह जांच कर सकते हैं कि मरीज का रक्त सामान्य रूप से जम रहा है या नहीं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रक्त बहने का ज्यादा जोखिम तो नहीं है। क्योंकि ज्यादा खून बहने से मरीज की जान भी जा सकती है। इसके लिए पीटी-आईएनआर टेस्ट किए जाते हैं। इससे पता चलता है कि रक्त कितने समय में जम रहा है। जिला अस्पताल में इस टेस्ट की जांच करने वाली मशीन फरवरी में खराब हो गई थी। इसकी जगह नई मशीन की डिमांड की गई थी, लेकिन अभी तक जिला नागरिक अस्पताल की तरफ से यह मशीन नहीं खरीदी गई है।
लैब में जो सामान खत्म होता है डिमांड आने पर उसे मंगवा दिया जाता है। फार्मासिस्ट स्टोर को सामान मंगवाने की जिम्मेदारी दी गई है। जो सामान खत्म हुआ है, वह जल्द ही मंगवा दिया जाएगा। - डॉ. नवजोत किरन टिवाना, पीएमओ, जिला नागरिक अस्पताल यमुनानगर।