संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव को भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप देने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धूमन सिंह किरमच और हरियाणा विद्युत नियामक बोर्ड के सदस्य मुकेश गर्ग ने आदिबद्री स्थित गरुड़ टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में महोत्सव को सफल बनाने के लिए व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बसंत पंचमी के अवसर पर 19 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव का विधिवत शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री इस दौरान विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास और उद्घाटन भी करेंगे। महोत्सव का समापन 23 जनवरी को सरस्वती तीर्थ पेहोवा, कुरुक्षेत्र में होगा।
महोत्सव के दौरान आदिबद्री स्थित सरस्वती सरोवर पर हवन, श्लोक उच्चारण और भव्य आरती का आयोजन किया जाएगा। साथ ही पुरातत्व विभाग की ओर से एक विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें आमजन को यह जानकारी दी जाएगी कि सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा प्रमाण सरस्वती नदी है और इसका उद्गम स्थल आदि बद्री माना जाता है। आयोजन का उद्देश्य सरस्वती सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत से समाज को जोड़ना है।
सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड द्वारा लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में बनाए जा रहे रिजर्व वायर का निरीक्षण भी मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा बाबा केदारनाथ, बाबा बद्री विशाल और माता मंत्रा देवी के दर्शन कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। रत्नावली कार्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले कॉलेज विद्यार्थियों की विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी महोत्सव में आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
यमुनानगर जिले के संतों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा। आदिबद्री मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन होगा। वहीं, सरस्वती सरोवर पर स्वदेशी थीम आधारित सरस मेला लगाया जाएगा, जिसमें स्वयं सहायता समूहों द्वारा करीब 20 स्टॉल लगाए जाएंगे। यह मेला स्थानीय हस्तशिल्प, स्वदेशी उत्पादों और ग्रामीण संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रमुख माध्यम बनेगा।