संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय में दैनिक जीवन में श्रीमद्भागवत गीता की शिक्षाएं और दर्शन पर एक दिवसीय कार्यशाला करवाई गई। प्राचार्या डॉ. करुणा ने बताया कि श्रीमद्भागवत गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन, कर्म व कर्तव्य की व्यावहारिक मार्गदर्शिका है। इसकी शिक्षाएं वर्तमान शैक्षणिक व सामाजिक संदर्भों में अत्यंत प्रासंगिक हैं।
इस दौरान डॉ. वीरेंद्र सिंह ढिल्लो ने गीता के दार्शनिक और शैक्षणिक महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के तकनीकी प्रथम सत्र में प्रो.पूनम गर्ग, दीपक, प्रो. अनुराधा, प्रो. ऋतु बाला ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। दूसरे सत्र में प्रो. शीतल ने गीता के नैतिक, शैक्षिक व व्यवहारिक पक्षों पर विचार रखे। प्रतिभागियों ने प्रस्तुतियों को ज्ञानवर्धक एवं चिंतनशील बताया।
प्रो. दीपक ने कर्म, विचार और वृति के संदर्भ में श्रीमद्भागवत गीता के विचार साझा किया। प्रो. रणदीप, डॉ. लखपत सिंह, प्रो. सीमा जैन, प्रो. हीना ने गीता का महत्व बताया। डॉ. उषा ने शांति के मार्ग पर प्रकाश डाला, जो मानव और समाज के विकास की कुंजी है। नीरज रानी ने विषद से विवेक की ओर छात्र जीवन में श्रीमद्भागवत गीता की शिक्षा विषय पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया।
प्रो. शीतल ने गीता से प्रबंधन संबंधी शिक्षाओं पर चर्चा की। इसमें उन्होंने बताया कि प्रबंधक गीता के विचारों से आदर्श जीवन का अर्थ सीखते हैं। प्रो. अनुराधा ने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर विचार रखे। रविंद्र कुमार ने गीता में वर्णित मित्रता के विचार पर चर्चा की। सच्चे व झूठे संबंधों पर ध्यान केंद्रित किया। डॉ. अनीता ने वैदिक दर्शन की प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए।