संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। साध्वी रबिया भारती ने साधकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सूत्रों को उद्घाटित किया। उन्होंने कहा कि ध्यान-साधना के मार्ग में बहुत सी बाधाएं आती हैं। इन बाधाओं से गुरु पार कराते हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान की दीक्षा के पश्चात साधक की वास्तविक आध्यात्मिक यात्रा प्रारंभ होती है। यह यात्रा कहीं बाहर नहीं अपितु अपने मिथ्या अहंकार को त्याग कर सत चित आनंद स्वरूप होकर अपनी वास्तविक पहचान प्राप्त करने की यात्रा है। आलस्य, प्रमाद, मन के विकार, बुद्धि के विचार और संसार के प्रति मोह व आसक्ति बाधा है, जिसे एक साधक गुरु आज्ञा में चलते हुए पार कर लेता है।
साध्वी ने कहा कि साधना के दौरान अपने ही विकारों को देखकर साधक के भीतर हीन भावना न आए इसलिए उसे आत्मनिरीक्षण करते हुए गुरु के चरणों में पूर्ण रूप से समर्पण कर देना चाहिए। गुरु से प्राप्त ज्ञान के प्रकाश में जब साधक अपने विचारों और कर्मों को देखता है, तब उसके भीतर परिवर्तन की प्रक्रिया प्रारंभ होती है।
उन्होंने समझाया कि अहंकार साधना की अत्यंत सूक्ष्म बाधा है। कभी-कभी साधक को अपनी साधना, ज्ञान अथवा आध्यात्मिक अनुभवों पर गर्व होने लगता है। ऐसे में वह अपने भीतर हो रहे परिवर्तन को गुरु-कृपा के बजाय अपना व्यक्तिगत सामर्थ्य एवं पुरुषार्थ समझने लगता है, इससे साधक का पतन हो सकता है। जब साधक ध्यान-साधना के साथ अपने आचरण को भी शुद्ध करने का प्रयास करता है, तब ज्ञान उसके जीवन में उतरता है। साध्वी ने भजनों का गायन भी किया।