संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के 44वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि जैन धर्म के विशिष्ट पर्व पर्यूषण महापर्व शुरू हो गए हैं। पर्यूषण को महापर्व की संज्ञा दी जाती है। अन्य किसी भी पर्व व्रत या त्योहार को यह गौरव प्राप्त नहीं है, जो पर्यूषण व संवत्सरी को प्राप्त है।
उन्होंने बताया कि इसके पीछे एक कारण है कि बाकी जितने भी पर्व हैं, वह सब मौज मस्ती व बाहरी सफाई से जुड़े हुए हैं। लेकिन महापर्व पर्यूषण आंतरिक सफाई करने का संदेश देता है। यह पर्व आठ दिन तक मनाया जाता है। इन दोनों अनंतगढ़ सूत्र की वाचना की जाती है। इस आगम में 90 महापुरुषों का वर्णन है, जिन्होंने राजपथ, धन-वैभव, घर-परिवार सबकुछ छोड़कर संयम के पथ पर अपने कदम बढ़ाए और अपनी आत्मा को उज्ज्वल बनाया हैं। ऐसे महान पुरुषों के जीवन चरित्र सुनने से हमारा जीवन भी उच्चता प्राप्त करता है।