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Yamuna Nagar News: मिट्टी का चूल्हा बना व्रतियों ने किया खरना

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यमुनानगर सब्जी मंडी में लगी खरीदारों की भीड़। संवाद
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जगाधरी। सूर्य देवता और छठी मैया की उपासना का महापर्व छठ की तैयारियां जोरों पर हैं। चार दिन चलने वाला कठिन व्रत हजारों लोग संतान सुख, सुख समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए रखते हैं।
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नहाय-खाय के बाद बुधवार को दूसरे दिन खरना किया गया। इस दौरान महिलाओं ने मिट्टी का चूल्हा तैयार किया। इस चूल्हे पर विभिन्न पकवान बनाए गए। वहीं, खरना में सबसे महत्वपूर्ण पकवान गन्ने की रस की खीर बनाई जाती है। महिलाएं दिन भर इस पूजन कार्य में जुटी रही। छठ का वीरवार को तीसरा दिन होगा और महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला व्रत प्रारंभ हो जाएगा। छठ के दिन नदी, नहर, पोखर, तालाब इत्यादि के पानी में खड़े होकर अस्त और उदय होते सूर्य को अर्घ्य देने का प्रावधान है।
ऐसे में व्रती पूजा पाठ के साथ छठी मैय्या के प्रसाद की तैयारियों में जुटे रहे। वहीं, छठ पर भी बाजारों में दिवाली की तरह भीड़ रही। शहर के तमाम बाजारों में खूब रौनक देखने को मिली। इस दौरान कपड़ों, फल-फूल, मिष्ठान, सब्जी, सजावट के सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स की दुकानों पर भीड़ देखने को मिली।
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लोगों ने दिवाली की तरह खूब खरीदारी की। इसके अलावा पर्व को लेकर पश्चिमी यमुना घाट पर कर्मचारी तैयारियों में जुटे रहे। वीरवार को महिलाएं घाट पर पहुंचकर अस्तगामी सूरज को अर्घ्य देंगी। पर्व के दौरान किसी को परेशानी न हो इसके लिए प्रशासन की ओर से घाटों पर विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।
इसकी तैयारी देर शाम तक जारी रहीं। छठ पर विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों की ओर से पश्चिमी यमुना घाट पर सांस्कृति व धार्मिक कार्यक्रम भी करवाए जाते हैं। छठ को लेकर घर साल शहर के बाड़ी माजरा पुल पर करीब एक लाख लोगों की भीड़ उमड़ती है। इसके अलावा पुराना हमीदा, जमना गली, जम्मू कॉलोनी, गांधी नगर, जगाधरी, बूड़िया, खारवन सहित अन्य स्थानों स्थित घाटों पर छठ को लेकर कई कार्यक्रम होते हैं।

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माता सीता ने किया था व्रत

आचार्य सुरेश तिवारी ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, छठ पूजा की शुरुआत रामायण काल में हुई थी। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे आए थे। राज्याभिषेक के बाद माता सीता ने परिवार व राज्य की समृद्धि के लिए सूर्य देव की उपासना की और छठ व्रत का पालन किया।
उनकी इस आराधना से राज्य में सुख-शांति का संचार हुआ और तभी से इस व्रत व पूजन का परंपरा का आरंभ हुआ। उन्होंने बताया कि छठ व्रत को अत्यंत कठिन तपस्या माना जाता है। इसमें महिलाएं चार दिनों तक निराहार रहकर सूरज की पहली और अंतिम किरण को अर्घ्य देकर व्रत का पालन करती हैं।
छठ पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। यह पर्व जाति, धर्म की सीमाओं से परे है। समाज में आपसी समर्पण और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है। छठ पूजा में विशेष रूप से शुद्धता का ध्यान रखा जाता है। बाजार से लाए गेहूं के आटे का प्रसाद पवित्रता से बनाया जाता है। प्रसाद में प्रयोग फलों और फूलों की शुद्धता का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।
श्रद्धालु सीमा रानी, हेमवती, दुर्गा रानी, कांता रानी, छोटे लाल, रामजी लाल, सुरेश कुमार, मित्रसेन ने बताया कि छठी मैय्या के प्रति लोगों की भारी आस्था है। पहले यह केवल पूर्वोत्तर भारत में मनाया जाता था, परंतु अब यह पूरे भारत में मनाया जाता है। छठी माई की कृपा ऐसी है कि अब स्थानीय लोग भी यह पूजन व व्रत करने लगे हैं।
उन्होंने बताया कि छठ व्रत में सूर्य देव और छठी मैया का विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि छठी मैया संतान सुख, स्वास्थ्य और सौभाग्य की देवी हैं, जो श्रद्धा भाव से पूजा करते हैं, उनके जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

घाटों पर देर शाम तक चलती रही तैयारियां


छठ महापर्व पर पश्चिमी यमुना नहर घाट पर हजारों लोग उमड़ेंगे। ऐसे में इसे लेकर नगरनिगम व जिला प्रशासन की ओर से घाट पर सुरक्षा सहित अन्य सुविधाओं के प्रबंध किए जा रहे हैं। घाटों के किनारे रस्सी बांधी जारी रही हैं। वहीं, नहर के दोनों तरफ लाइटों का प्रबंध किया जा रहा है।
यह पर्व अंधेरे में होता है, ऐसे में यहां पर लाइट की सबसे ज्यादा जरूरी है। वहीं, दूसरी तरफ लोग भी पूजन व पर्व को लेकर तैयारियों में जुटे रहे। इस दौरान लोगों ने घाट पर पहुंचकर अपनी बेदियों की रंगाई पुताई की। कई लोगों ने नई बेदियों का निर्माण किया। इसके अलावा पूजन के दौरान बैठने के लिए जगह इत्यादि की व्यवस्था की।
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