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Yamuna Nagar News: सुघ गांव की अमूल्य धरोहर बचाने में विभाग नाकाम

Mon, 19 May 2025 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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सुरेश सैनी
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यमुनानगर। अपने भूगर्भ में तीन कालखंडों को समाए सुघ गांव का प्राचीन टीला जल्द ही कब्जाधारियों की गिरफ्त में होगा। पुरातत्व विभाग इस अमूल्य धरोहर को बचा नहीं पा रहा है। विभाग की लापरवाही से कब्जाधारियों टीले के एक हिस्से की भूमि से छेड़छाड़ कर माइनिंग भी कर डाली। ऐसे में धीरे-धीरे यह रास्ता भी अब संकरा होता जा रहा है। विभाग इस टीले की सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन को लिखित में अवगत कराने की बात का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ रहा है।

सुघ के इस प्राचीन टीले में समाई अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर की खोज होने के बाद पुरातत्व विभाग ने यहां पर दिशा-निर्देशों का बोर्ड लगा दिया था। यह बोर्ड केवल शोपीस बनकर रह गया। वहीं अवशेष अधिनियम, 1964 के तहत कोई भी इस स्मारक को नष्ट करता है, हटाता है या नुकसान पहुंचाता है, बदलता है या दुरुपयोग करता है, उसे तीन महीने तक के कारावास या पांच हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
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इसके अलावा, हरियाणा प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष नियम 1965 के नियम 29 के तहत संरक्षित सीमा से 15 मीटर तक का क्षेत्र और संरक्षित स्मारक के पास या उससे सटे 30 मीटर तक के क्षेत्र को प्रतिबंधित और विनियमित घोषित किया गया है। इन सब के बाद भी प्राचीन टीले से छेड़छाड़ की जा रही है। संवाद
टीले की परिधि पांच किलोमीटर
पुरातत्व विभाग ने टोपरा कलां, सुघ और संधाय गांव की भूमि में समाई अमूल्य ऐतिहासिक बौद्ध विरासत को धरातल पर लाने के लिए बीती 25 जनवरी को कानपुर की भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी) टीम से सर्वे कराया गया था। सुघ का यह टीला अमादलपुर दयालगढ़ गांव के पास स्थित है। टीले की परिधि लगभग पांच किमी है और यह यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र के पश्चिमी तट पर स्थित है। इस टीले की खुदाई पंजाब विश्वविद्यालय के डाॅ. सूरज भान ने की थी और आगे की खोदाई हरियाणा सरकार के पुरातत्व और संग्रहालय विभाग के डीएस मलिक और एम अचार्य ने की थी। उत्खनन के दौरान व्यवसाय के तीन कालखंडों का पता चला। यहां से चित्रित धूसर मृदभांड, टेराकोटा, मानवकृतियां और प्राचीन सिक्के मिले थे।
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टीला पुरातत्व विभाग के अधीन है, ऐसे में यहां किसी प्रकार की कोई गतिविधि नहीं हो सकती। इस भूमि की सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन को लिखा है। अमूल्य धरोहर की भूमि के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। - बिनानी भट्टाचार्य, उप निदेशक, पुरातत्व विभाग।
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