यमुनानगर। बाढ़ बचाव कार्यों पर डेढ़ दशक में करीब 200 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं पर अब भी कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। इस बार सिंचाई विभाग ने बाढ़ बचाव कार्य शुरू करने में ही देरी कर दी। अब तक कई जगह तीनों नदियों पर तटबंध व स्टड बनाने के कार्य अधूरे हैं, वहीं खानूवाला सहित कई जगह कार्य शुरू भी नहीं हो पाए हैं। ऐसे में नदियां के साथ सटे गांवों में रह रहे लोगों को मानसून की बरसात में बाढ़ का भय है।
सिंचाई विभाग को यमुना, सोम व पथराला नदियों पर बाढ़ बचाव का कार्य करना हैं। इन नदियों पर तटबंध व स्टड बनाने व मरम्मत का कार्य 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद मानसून सीजन शुरू हो जाएगा, जिसमें नदियों के उफान पर आने से साथ लगते क्षेत्रों में भूमि कटाव व बाढ़ का खतरा बना रहता है। ऐसी स्थिति न हो, इसलिए तीनों नदियों पर 34 करोड़ रुपये में 43 बाढ़ बचाव के कार्य किए जाने हैं। इस मामले में सीएम अधिकारियों के साथ बैठक कर चुके हैं। इसके बाद निरीक्षण पर आए सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर नितिश जैन भी अफसरों व एजेंसियों को 15 जून से पहले कार्य पूरे करने की हिदायत दे गए हैं। इसमें दस दिन शेष हैं, पर अधिकांश जगह कार्य अधूरे हैं। ये देख 15 जून छोड़ 30 जून तक भी कार्य करना चुनौती से कम नहीं है।
गत वर्ष यहां बने बुरे हालात-
गत वर्ष यमुना नदी से कमालपुर टापू, लापरा में बाढ़ आई। कमालपुर टापू में तो भूमि कटाव आबादी के नदजीक पहुंच गया था। तब कई परिवार सामान सहित पलायन करने पर मजबूर हुए थे। उस समय बचाव के लिए सेना को बुलाना पड़ा था। ग्रामीणों ने यमुना को शांत करने के लिए कई तरह के अनुष्ठान भी किए थे।
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इन गांवों पर अधिक खतरा-
मालीमाजरा, नवाजपुर, लाक्कड़, लेदी, बेलगढ़, टापू कमालपुर, औदरी, लापरा, बीबीपुर, मांडेवाला, खानूवाला, आंबवाली, टिब्बड़ियों, काटरवाली, रामपुर गेंदा, रणजीतपुर, भंगेड़ा, मलिकपुर, रणजीतपुर, मुजाफ्त, नगली, प्रह्लादपुर, पौबारी, संधाला, संधाली, लालछप्पर, मॉडल टाउन करेहड़ा, उन्हेड़ी, गुमथला सहित कई गांव पर बाढ़ का खतरा रहता है, क्योंकि यह नदियों के साथ सटे हैं।
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करोड़ों खर्च फिर भी बनते बाढ़ के हालात-
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजु गुंदियाना ने कहा कि बाढ़ राहत कार्यों पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी हर मानसून में नदियों के उफान से बाढ़ व भूमि कटाव के हालात बने। इसमें किसानों व अन्य ग्रामीणों को बड़ा नुकसान हुआ। इस बार भी मानसून में बाढ़ व भूमि कटाव की आशंका है, क्योंकि नदियों पर तटबंध व स्टड जैसे बाढ़ राहत कार्य देरी से शुरू हुए, जिनमें ज्यादातर अब तक अधूरे हैं। कई स्थानों पर यह काम शुरू भी नहीं हुए हैं। यह काम 15 जून से पहले पूरे हो जाने चाहिए, पर 30 जून तक भी होने मुश्किल हैं।
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वर्जन-
बाढ़ बचाव कार्य का टेंडर देरी से हुआ। इससे समस्या आई। साथ ही इस कार्य में इस्तेमाल होने वाले पत्थर नहीं मिल रहे हैं। इससे कई जगह पर काम शुरू नहीं हुआ। जल्द सभी जगह बाढ़ बचाव कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।- जसपाल सिंह गिल, एसडीएम, बिलासपुर।