जगाधरी। सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल के सभागार से वीरवार को किसी के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। इस दौरान सभागार में काफी लोग उपस्थित थे। चीख के साथ लोगों की आंखें बड़ी हो गई और जीभ दांतों के नीचे दब गई। यहां कोई हादसा नहीं हुआ था, बल्कि नाटक का मंचन चल रहा था।
मंचन भी स्कूल के विद्यार्थी कर रहे थे। विद्यार्थी शिक्षा विभाग की ओर से करवाई जा रही राज्यस्तरीय विधिक साक्षरता प्रतियोगिता के दौरान नाटक पर प्रस्तुति दे रहे थे। इस प्रतियोगिता में दो दिन में करीब 24 टीमों ने अपने अभिनय व कहानी का मंचन किया। हर नाटक की प्रस्तुति एक से बढ़कर एक रही।
कार्यक्रम कानूनी साक्षरता था तो नाटक के विषय भी ऐसे ही थे। इस दौरान विद्यार्थियों ने महिला यौन उत्पीड़न, अपराध, अधिकारों का हनन के नाटकों से महिलाओं की स्थिति, कानूनी अज्ञानता के जो दृश्य प्रस्तुत किए वे बेहद मार्मिक थे।
जिन्हें देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गई। इस दौरान विद्यार्थियों ने कई नाटक ऐसे प्रस्तुत किए जो सच्ची घटना से प्रेरित थे। नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने पुरुष प्रधान समाज, बाहुबली के अत्याचारों व पीड़िता के संघर्ष की कहानी दिखाई। वहीं, कार्यालय, सार्वजनिक स्थलों और अन्य स्थानों पर महिलाओं से बलात्कार, यौन उत्पीड़न, बच्चियों का शोषण इत्यादि पर भी कटाक्ष किया। महिलाओं की इन दर्द भरी कहानियों पर विद्यार्थियों के दमदार अभिनय ने इसे जीविंत कर दिया।
इस दौरान विद्यार्थियों ने उत्तरप्रदेश की एक सच्ची घटना का नाटक प्रस्तुत किया। जिसमें बाहुबली द्वारा वोट के लिए व्यक्ति की हत्या, उसकी पत्नी से बलात्कार, परिवार को जान से मारने का प्रयास और पीड़ित के संघर्ष का मंचन किया गया। कहानी के अंत में महिला का संघर्ष से दोषियों के गले में कानून का फंदा पड़ता है।
इस नाटक के मार्मिक दृश्यों ने सभी की आंखों से पानी छलका दिया। इसी तरह दहेज के लिए बेटी की हत्या और माता-पिता की बेबसी के दृश्य देखकर भी बेचैन हो गए। विद्यार्थियों ने अपने मंचन से दिखाया कि शिक्षित समाज में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। वहीं, महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं है।
इस दौरान कन्या भ्रूण हत्या और बहू के लिए लड़कियां खरीदने के हृदय विदारक नाटक ने सभी की आंखें झलका दी। कार्यक्रम में जिला सेशन जज एवं जिला लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के चेयरमैन आरसी डिमरी मुख्यातिथि थे। विद्यार्थियों की प्रस्तुति देखकर निर्णायक मंडल को विजेता चुनने में परेशानी हुई। विद्यार्थियों ने नाटकों से कानूनी साक्षरता का महत्व पर जोर दिया। उनकी प्रस्तुतियों से सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।