संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापनगर। नया बांस गांव के पंचायत भवन में चल रही श्री राम कथा के सातवें दिन श्री रामचरित मानस की कथा में सीता हरण प्रसंग सुनाया गया। उन्होंने कहा कि रामायण में सीता हरण से रावण के पतन की गाथा शुरू होती है।
उन्होंने कहा कि भगवान राम, माता सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ पंचवटी के आश्रम में रह रहे थे। वे 14 वर्ष के वनवास का समय व्यतीत कर रहे थे। उस दौरान एक दिन शूर्पणखा का वहां आगमन होता है, जो भगवान राम और लक्ष्मण को देखकर मोहित हो जाती है। वह भगवान राम को विवाह का प्रस्ताव देती है, लेकिन वे सीता के बारे में बताकर मना कर देते हैं और उसे लक्ष्मण के पास भेज देते हैं।
लक्ष्मण शूर्पणखा के प्रस्ताव को नकार देते हैं तो वह सीता को मारने के लिए आगे बढ़ती है, ताकि उनके मरने पर श्रीराम उससे विवाह कर लें। तभी लक्ष्मण बीच में आ जाते हैं और शूर्पणखा का नाक काट देते हैं। शूर्पणखा वहां से भागकर अपने भाइयों खर और दूषण के पास मदद के लिए जाती है, वे दोनों श्रीराम से युद्ध में मारे जाते हैं, तो शूर्पणखा रावण के पास मदद के लिए जाती है और यहीं से रावण सीता हरण की साजिश रचता है।