संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। एसडी प्रबंधन एवं तकनीकी संस्थान में मंगलवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया। जिसके अंतर्गत कॉलेज मे कार्यक्रम करवाया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को तनाव व अवसाद से दूर रहने व आत्महत्या रोकथाम के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।
इसका विषय आत्महत्या पर कहानी बदलना रहा। कार्यक्रम में सिविल अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. नवीन शर्मा ने मुख्य वक्ता रहे। इस दौरान डॉ. नवीन ने कहा कि जो लोग खुदकुशी की कोशिश के बाद बच जाते हैं, उन्होंने परामर्श के दौरान यह बात मानी है कि वे मरना नहीं, बल्कि अपनी परेशानियों व दुखों से छुटकारा चाहते हैं।
वो एक ऐसी खास परिस्थिति से जूझे थे, जहां जीने और मरने में उन्हें अंतर नहीं समझ आता था। उन्होंने कहा कि इस तरह का विचार आता है तो मदद मांगने में संकोच न करें। हिम्मत करें और अपनी तकलीफ साझा करें। सही दिनचर्या अपनाएं। हंसे-मुस्कुराएं और अपनी बातें साझा करें। अपनी क्षमता के हिसाब से कॅरिअर और रिश्तों का चुनाव करें।
जिला अस्पताल की लुभांशी ने कहा कि खुदकुशी करने वाले ज्यादातर लोगों की बातों या व्यवहार में कुछ सप्ताह पहले से संकेत दिखने लगते हैं। कुछ मामले तुरंत आवेग के भी होते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में खुदकुशी से पहले एक खास किस्म की चिंता, तनाव, हताशा या इस तरह का कोई लक्षण जरूर दिखता है। ऐसे संकेत समय रहते समझा जाए और उनका निदान किया जा सकता है।