यमुनानगर। सीमित साधनों, अत्यधिक फीस और बैंकों के शिक्षा ऋण पर ब्याज के भार के कारण व्यावसायिक शिक्षा, तकनीकी डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर व चिकित्सा शिक्षा आदि प्राप्त करने से वंचित रहने वाली छात्राओं को शिक्षा के लक्ष्य को सुगम करने के लिए सरकार की ओर से सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। ये जानकारी डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि उपरोक्त योजना के तहत देश-विदेश में शिक्षा ग्रहण करने वाली हरियाणा मूल की छात्राएं एवं हरियाणा सरकार में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों की बेटियां और पत्नी पात्र होंगी हैं।
उन्होंने बताया कि ऋण बैंक की उच्च शिक्षा योजना के अनुसार ही दिया जाएगा। इसमें प्रत्येक हरियाणा निवासी महिला व लड़की ऋण की पात्र है। शिक्षा के लिए आमदनी, जाति एवं संप्रदाय मापदंड नहीं है। डीसी ने बताया कि बैंक अगर 9.25 प्रतिशत की ब्याज दर पर ऋण देते हैं तो छात्राओं को अपनी जेब से सिर्फ 4.25 प्रतिशत ब्याज देना होगा। इसके साथ ही पांच प्रतिशत राशि महिला विकास निगम चुकाएगा। ऋण स्वीकृत होने के बाद बैंक स्वीकृत पत्र की एक प्रति संबंधित जिला प्रबंधक के पास भेजनी होगी। जिसमें दिनांक व ऋण की राशि स्पष्ट रूप से अंकित होनी चाहिए। प्रार्थी बैंक ऋण के वितरित होने वाली हर किस्त प्रति जिला प्रबंधक कार्यालय में भेजेगा। प्रार्थी का कोर्स खत्म होने तक या खत्म होने के दो साल के अंदर अपनी फाइल कार्यालय में जमा करवा सकता है।