संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। कड़ाके की सर्दी में शिक्षा विभाग ने मिड-डे-मील का मेन्यू में बदलाव किया है। इसके तहत मिड-डे-मील में बच्चों को ऐसे खाद्य पदार्थ परोसे जाएंगे, जो अधिक उष्मा व ऊर्जा प्रदान करते हैं। गर्म तासीर के भोजन से बच्चों का शरीर की उष्मा बनी रहेगी और उनका सर्दी से बचाव होगा। निदेशालय की ओर से सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, मिड-डे-मील प्रभारियों को पत्र जारी किया है। वहीं जिला व खंड अधिकारियों को इसकी समीक्षा व निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
ठंड और लगातार गिरते तापमान को देखते हुए बच्चों की डाइट में बदलाव किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को संतुलित पौष्टिक आहार के साथ पूर्ण पोषण देना है। इससे उनका सर्दी से बचाव होगा। वहीं, ऐसे भोजन से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होगी। इससे वे सर्दी लगने से होने वाले विभिन्न रोगों से बचे रहेंगे। यही नहीं स्वास्थ्य ठीक रहने से बच्चे एक्टिव रहेंगे और उनका मन पढ़ाई व गतिविधियों में लगेगा। शरीर चुस्त फुर्त और मस्तिष्क एकाग्र रहेगा। इससे बच्चों की एकाग्रता और सक्रियता में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला।
निदेशालय की ओर से जारी पत्र में सर्दियों को लेकर पूरा मैन्यू जारी किया है। निदेशालय ने इस मौसम में बनने वाले खाद्य पदार्थों की सूची दी है। विद्यालय अपनी सुविधा अनुसार खाने बनाने का दिन निर्धारित कर सकते हैं। इसके अनुसार विद्यालय में बच्चों को मिठा दलिया, मिस्सी रोटी, चना दाल खिचड़ी, नमकीन दलिया, पराठा-सबजी, मेथी चावल, तिल, गुड़ के चीला, रागी-गेहूं के पूडे शामिल किए गए हैं।
इसके अलावा भोजन में मौसमी सब्जियां भी परोसी जाएंगी। सोया खिचड़ी भी दी जाएगी। सोया को उच्च प्रोटीन वाला पदार्थ माना जाता है। इसका प्रोटीन मांसपेशियों व हड्डियों के विकास के लिए अमृत समान है। वहीं, पराठे, पूड़े, चीले बनाने के लिए विभिन्न विधियां अपनाई जाएंगी। इसके चने की आटा, गेहूं का आटा व बेसन मिलाकर बनाया जाएगा। निदेशालय ने यह मैन्यू डाइटिशियन व विशेषज्ञों की सलाह से तैयार किया है। यह व्यंजन खाने में पौष्टिक होने के साथ स्वाद होते हैं, जो बच्चे बड़े चाव से खाते हैं।
सर्दियों को देखते हुए निदेशालय ने मिड-डे-मील के मेन्यू में बदलाव किया है। इसके अंतर्गत बच्चों को गर्म तासीर वाले व्यंजन परोसे जाएंगे। यह बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूर व उत्तम होगा। इससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और शारीरिक व मानसिक विकास होगा। पिरथी सैनी, उप-जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।