संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कृषि विज्ञान केंद्र दामला में शुक्रवार को विश्व मृदा दिवस के उपलक्ष्य में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के संयोजक डॉ. संदीप रावल विद्यार्थियों को मृदा स्वास्थ्य के महत्व पर विस्तृत रूप से अवगत कराया।
उन्होंने मृदा को एक जीवंत अवयव बताते हुए कहा कि जैसे मानव शरीर के उत्तम संचालन के लिए स्वास्थ्य आवश्यक है, उसी प्रकार कृषि के सतत विकास के लिए मृदा का स्वस्थ और उपजाऊ होना अत्यंत अनिवार्य है। मातृभूमि हमें भोजन, जल और जीवन प्रदान करती है, इसलिए मृदा स्वास्थ्य की रक्षा करना हमारा सामाजिक और नैतिक दायित्व है।
उन्होंने विद्यार्थियों को संकल्प दिलाया कि वे फसल अवशेषों को खेतों में नहीं जलाएंगे, हानिकारक रसायनों का अनावश्यक प्रयोग नहीं करेंगे और प्राकृतिक तरीकों को अपनाकर एक जागरूक दिशा में योगदान देंगे, अपने माता-पिता एवं संबंधियों को प्रेरित करेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को पेड़ लगाने एवं रसोई के वेस्ट का प्रयोग खाद के रूप में करने की सलाह भी दी।
मृदा वैज्ञानिक डॉ. विशाल गोयल ने विद्यार्थियों को मृदा की संरचना, पोषक तत्वों की भूमिका और प्राकृतिक तरीकों से मृदा उर्वरता बढ़ाने के उपायों के बारे में व्यापक जानकारी देते हुए बताया कि बेहतर और गुणवत्तापूर्ण फसल उत्पादन के लिए पौधों को 17 आवश्यक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जो मूल रूप से मृदा और वातावरण से प्राप्त होते हैं।
उन्होंने बताया कि यदि मृदा का स्वास्थ्य खराब होता है तो इन तत्वों की उपलब्धता कम हो जाती है, जिसके कारण न केवल उत्पादन घटता है बल्कि किसानों की लागत भी बढ़ जाती है। फसल अवशेषों को खेत में वापस मिलाना, पशुओं के अपशिष्ट से प्राप्त गोबर की खाद का उपयोग तथा हरी खाद वाली फसलों को खेत में मिलाना मृदा की उर्वरा शक्ति और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के सर्वोत्तम उपायों में से हैं। केवीके से डॉ. करण सैनी, पीएमश्री राजकीय माध्यमिक विद्यालय दामला के शिक्षक दर्शन लाल, केएल सैनी, ममता शर्मा, अमिता शर्मा तथा विद्यालय के लगभग 50 विद्यार्थियों ने भाग लिया।