संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। केंद्रीय विद्यालय कपालमोचन में प्रवर चिकित्सा अधिकारी डॉ. शमा परवीन ने डायरिया से बचाव के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को डायरिया के बारे में जानकारी देने के साथ बचाव के लिए जागरूक किया गया।
डाॅ. शमा ने बताया कि डायरिया में उलटी-दस्त होते हैं, जिसे हमें हलके में नहीं लेना चाहिए। यह तीन प्रकार से होता है। एक्यूट डायरिया लगातार होने वाला डायरिया, क्रोनिक डायरिया, जिसमें वायरल होता हैं। आईबीडी आंतों में होने वाली एक समस्या है। इसमें मल में खून आना व बार-बार पतला मल आना आदि शामिल हैं।
जब आपका पाचन तंत्र कमजोर पड़ जाता हैं तो आपको डायरिया के लक्षण नजर आने लग जाते हैं। जैसे जी मचलाना, पेट में मरोड़ उठना, दस्त लगना, सूजन, बुखार, कम पेशाब आना, मुंह का सूखना, सिर दर्द, थकान, सुस्ती, अधिक नींद आना ऐसे लक्षण जल्द डायरिया होने के होते हैं।
डाॅ. शमा ने केंद्रीय विद्यालय के छात्रों को ऐसी स्थिति में पेय पदार्थ अधिक मात्रा में लेने, ओआरएस का घोल बार-बार लेनेे की सलाह दी ताकि आपके शरीर में पानी की मात्रा कम न हो। सभी आशा वर्कर एक जुलाई से 31 अगस्त तक घर-घर जाकर दस्त रोगी की पहचान करेंगी। मौके पर स्कूल प्रिंसिपल अरूण कुमार, बीईईओ गुरदेव सिंह, सुषमा गुलाटी, एएनएम दीपिका व स्कूल स्टाफ मौजूद रहा।