संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के साथ महिलाएं अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर महिलाएं परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।
स्वरोजगार अपनाकर कई महिलाओं ने अपनी मेहनत और हौसले से मुकाम हासिल किया है। इनमें से कई महिलाओं की पहचान अब लखपति दीदी के रूप में भी बनी है। महिलाओं का कहना है कि पहले परिवार की जरूरतों के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन काम शुरू करने के बाद आत्मविश्वास बढ़ा है।
अपने पैरों पर खड़े होने से परिवार में सम्मान के साथ निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ी है। रजविंद्र, कोमल, नीलम, कविता, संजोत, रीना, प्रवीन और ममता आदि महिलाओं का कहना है कि यदि परिवार का साथ और भरोसा मिले तो कोई भी काम मुश्किल नहीं है। महिला चाहे घर से काम शुरू करे या बाहर निकलकर रोजगार से जुड़े, उसकी मेहनत और इच्छाशक्ति उसे आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।
महिलाओं ने बताया कि परिवार और काम के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। शुरुआत छोटे स्तर से करने के बाद काम को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है। इससे न केवल आमदनी में इजाफा होता है, बल्कि महिलाओं का हौसला भी बढ़ता है। काम के माध्यम से महिलाओं को नई पहचान और समाज में सम्मान मिल रहा है।
सफलता से दूसरी महिलाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है। एक महिला के आत्मनिर्भर बनने से उसके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ आसपास की अन्य महिलाओं में भी कुछ नया करने का विश्वास पैदा हो रहा है। यही वजह है कि अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाएं स्वरोजगार और आय के नए साधन तलाश रही हैं।
महिलाओं की सफलता से परिवार खुश
परिवार के लोगों का कहना है कि महिलाएं अपनी क्षमता के अनुसार समाज में अहम भूमिका निभा रही हैं। पहले जहां महिलाओं की भूमिका अधिकतर घर तक सीमित मानी जाती थी, वहीं अब वे सरकारी, गैर सरकारी क्षेत्र और कारोबार में भी अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। महिलाओं को अवसर और प्रोत्साहन मिले तो वे परिवार के साथ-साथ समाज और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।