साढौरा। कस्बे में बेसहारा कुत्तों के झुंड लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। आए दिन बच्चों और राहगीरों पर कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आने से लोगों में भय का माहौल है। लोगों का आरोप है कि कुत्तों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं लेकिन नगरपालिका की ओर से समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही।
स्थिति यह है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत बेसहारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी करने के लिए नगर पालिका ने करीब आठ माह पहले डॉग शेल्टर तैयार करवा दिया था। कुत्तों को पकड़ने के लिए एजेंसी नहीं मिल पाने के कारण यह सुविधा अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
कस्बा निवासी सुमित वर्मा, पंकज सैनी, गौरव जैन और प्रभजोत सिंह सेठी ने बताया कि गलियों, चौक और बाजार में कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं। कई बार ये बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर हमला कर उन्हें घायल कर चुके हैं। दोपहिया वाहन और साइकिल सवारों का कुत्तों की ओर से दूर तक पीछा किए जाने से हादसों का खतरा भी बना रहता है।
लोगों का कहना है कि समस्या आम होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से उनमें रोष है। क्षेत्र में लोगों को रोजाना कुत्ते काट रहे हैं। शिवदेव वर्मा ने कहा कि लावारिस कुत्तों को शेल्टर होम में रखने और उनकी नसबंदी करने के निर्देश हैं। हिंसक कुत्तों को भी शेल्टर होम में रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए। कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।
अधिवक्ता महावीर सेठी ने बताया कि जर्मन शेफर्ड, रॉटविलर और पिटबुल जैसे पालतू कुत्तों के हमले के मामले भी सामने आए हैं। उनका कहना है कि खतरनाक नस्ल के कुत्तों के पालन और पंजीकरण को लेकर नियम हैं। कई लोग नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। संवाद
तीन बार निविदा में नहीं मिली एजेंसी : शालिनी शर्मा
नगर पालिका अध्यक्ष शालिनी शर्मा ने बताया कि बेसहारा कुत्तों को पकड़ने और उनकी नसबंदी के लिए डॉग शेल्टर तैयार किया गया है। कुत्तों को पकड़ने के लिए तीन बार निविदा लगाई गई। किसी एजेंसी ने काम लेने में रुचि नहीं दिखाई। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
खस्ता हालत में साढौरा में बनाया गया डॉग शेल्टर। संवाद- फोटो : credit