खंड बिलासपुर के सुंदर बहादुर गांव में राष्ट्रीय पक्षी मोर का शिकार करने वाले मामले में एक अहम बात निकल कर सामने आई है। वन्य जीव प्राणी विभाग की पड़ताल के अनुसार तस्कर जंगल में मोर का शिकार ही नहीं बल्कि उसे चोरी से पकड़ कर हिमाचल में काले जादू के लिए भी बेचते हैं। खासकर वीरवार के दिन तस्कर जंगल में मोर का शिकार करने के लिए निकलते हैं, चूंकि इसी दिन हिमाचल में काला जादू होता है। ऐसे में देश का राष्ट्रीय पक्षी मोर अब जंगल में सुरक्षित नहीं रहा। तस्करों की नजर अब इस पक्षी पर पड़ चुकी है। जबकि मोर को मारना सख्त वर्जित है और धारा 51(1-ए) के अनुसार कारावास की सजा हो सकती है जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
वन्य जीव प्राणी विभाग की जांच में एक और बात सामने आई है। जिन तस्करों ने सात दिसंबर की रात को सुंदर बहादुर क्षेत्र के जंगल में मोर का शिकार किया था। उसमें एक नाम वलीद्दीन नाम के व्यक्ति का सामने आया है। यह मजदूर वन विभाग में कभी कभार भाड़े पर मजदूरी के आधार पर कार्य करता था और तस्कर इमरान का ससुर है। विभागीय जांच के अनुसार वलीद्दीन की शह पर तस्कर जंगल में घुसकर मोर व अन्य पक्षियों का शिकार करते थे। इतना ही नहीं विभाग की जांच में पता चला है कि तस्करों ने सात दिसंबर की रात को जिस एयरगन से मोर का शिकार किया था, वह भी किसी ओर के नाम है। जिसकी जांच की जा रही है। बरहाल मामले में आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
बता दें सुंदर बहादुरपुर गांव के जंगल पर तस्करों की नजर इसलिए ज्यादा है चूंकि यहां पर काला तीतर, मोर, जंगली मूर्गों की संख्या काफी है। हालांकि इसी जंगल में इस प्रकार के पक्षियों के अलावा तेंदुआ, सेही, जंगली सुअर आदि जानवर भी पाए जाते हैं, किंतु तस्कर ज्यादातर काला तीतर व मोर को ही अपना शिकार बनाते हैं और इनके मीट की सप्लाई करते हैं।
जांच में सामने आया है कि आरोपी इमरान का रिश्तेदार वलीद्दीन की शह पर ही आरोपी मोर का शिकार करते थे। पड़ताल के अनुसार तस्कर जंगल में मोर का शिकार ही नहीं बल्कि उसे चोरी से पकड़कर हिमाचल में काले जादू के लिए भी बेचते हैं। खासकर वीरवार के दिन तस्कर जंगल में मोर का शिकार करने के निकलते है, इसके अलावा आरोपियों ने जिस एयरगन से मोर का शिकार किया वह भी किसी ओर की बताई जा रही है।
-जयविंद्र नेहरा, निरीक्षक, वन्य जीव प्राणी विभाग।