संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ठेकेदार से मिलकर बिजली निगम में फर्जी बिलों के जरिए 12 करोड़ रुपये के गबन के मामले में गिरफ्तार क्लर्क प्रवीण कुमार व अशोक कुमार को रिमांड खत्म होने के बाद दोबारा कोर्ट में पेश किया गया। दोनों को पुलिस ने एक और दिन के रिमांड पर लिया है। वहीं पुलिस ने बिजली निगम से जो स्टाफ बरामद किया है अब उसकी जांच की जा रही है।
इतना ही नहीं रुपये का लेनदेन कहां-कहां होता था और रिकॉर्ड कहां रखा जाता था इसके लिए पुलिस आरोपियों को साथ लेकर निशानदेही करवाएगी। एक अन्य हेड क्लर्क कुंवर बहादुर अभी चार दिन के रिमांड पर है। अभी तक की गई जांच में एसआईटी के निशाने पर फिलहाल 52 लोग हैं। जिनमें बिजली निगम के सात एसडीओ व 17 जेई भी शामिल हैं। इतना ही नहीं रिकॉर्ड जुटा कर कई उच्चाधिकारियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी हो रही है। क्योंकि उच्चाधिकारियों के संज्ञान में यह मामला न हो ऐसा हो ही नहीं सकता।
एसआईटी इंचार्ज डीएसपी अभिलक्ष जोशी ने बताया कि आरोपी प्रवीण व अशोक को एक दिन के रिमांड पर लिया गया है। जो रिकॉर्ड अभी तक की जांच में बरामद किया है उसकी दोनों से निशानदेही करानी है। रिकॉर्ड को भी वेरिफाई किया जा रहा है। थाना शहर यमुनानगर में बिजली निगम के एक्सईएन पवन नरूला ने फर्जीवाड़ा का केस दर्ज कराया था। शिकायत में उन्होंने कहा था कि ससौली रोड स्थित एसबी रोडलाइन फर्म के पास बिजली निगम के कार्यों का ठेका था।
वर्ष 2021-22 व 2022-23 के रिकार्ड की जांच करने पर सामने आया कि एसबी रोडलाइन ने डिवीजन के कार्यालय में पेमेंट के लिए फर्जी बिल जमा किए हैं। कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई थी। लगभग दो करोड़ रुपये का गबन हुआ है। बिजली निगम ने आडिट कराया तो यह 12 करोड़ रुपये का घोटाला निकला।
पुलिस ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। एसआइटी अब तक तत्कालीन एक्सईएन कुलवंत सिंह, बिलिंग क्लर्क राजबीर सिंह लाइनमैन, बलवीर व फर्म के कर्मचारी संजीव, हेड क्लर्क कुंवर बहादुर सिंह, क्लर्क कम लाइनमैन अशोक कुमार और प्रवीण कुमार को गिरफ्तार कर चुकी है। लगभग तीन करोड़ रुपये की रिकवरी भी हो चुकी है।