संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। भगवान शिव के प्रिय श्रावण माह के स्वागत में रविवार को दिनभर लोग लगे रहे। वहीं शिवालयों के अन्य सभी मंदिरों में श्रावण माह की धूम रही। मंदिरों में देर शाम तक इसकी तैयारी चलती रही। इस पर जिले में 100 से ज्यादा कांवड़ शिविर लगाए जा रहे है। कांवड़ यात्रा की सुरक्षा के लिए 600 पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
इस बार श्रावण माह बेहद विशेष होने वाला है। चूंकि यह श्रावण मास पंच सोमवारी है। श्रावण माह का शुभारंभ सोमवार और समापन भी सोमवार को होगा। श्रावण के सोमवार में भगवान शिव की पूजा व जलाभिषेक करना अत्यंत शुभ व फलकारी माना जाता है। जिसके चलते शिवालय व अन्य मंदिर भी सुबह जल्दी खुलेंगे। अन्य दिनों की अपेक्षा श्रावण माह में मंदिर अलसुबह साढ़े तीन बजे खुल जाएंगे, लेकिन श्रद्धालु चार बजे से दर्शन कर सकेंगे।
श्रावण माह शुरू होने के साथ शहर के बाजार भोले बाबा के रंग में नजर आने लगे। बाजार की तमाम कपड़ों की दुकानों पर कांवड़ियों के वस्त्र नजर आ रहे हैं। संचालकों ने दुकानों ने बाहर कांवड़ियों के वस्त्र लगा रखे हैं। हालांकि कांवड़ यात्रा शुरू होने में दो तीन दिन हैं, लेकिन लोग अभी से इसकी तैयारी में जुट गए हैं। लोगों के साथ कांवड़ सेवा दल व संगठन भी तैयारियों में जुट हुए हैं। सभी सेवा दल अपने निर्धारित स्थान पर पंडाल बांधने व अन्य तैयारियां कर रहे हैं।
इस बार 100 से ज्यादा कांवड़ शिविर
जिले का पहला शिविर कलानौर में हरियाणा उत्तरप्रदेश के बॉर्डर पर लगाया जाता है। इस बार जिले में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों 100 से ज्यादा शिविर लग रहे हैं। कांवड़ यात्रा को लेकर जिला प्रशासन व पुलिस भी पूरी तरह अलर्ट है। जिला प्रशासन की ओर से कांवड़ शिविर लगाने वाले संगठनों को गाइड लाइन जारी की है।
कांवड़ यात्रा की सुरक्षा करेंगे 600 पुलिसकर्मी
बिना प्रशासन की अनुमति के खुले में शिविर नहीं लगाया जा सकता है। इसके अलावा सुरक्षा दृष्टि से पुलिस ने भी एडवाइजरी जारी की है। कांवड़ यात्रा के लिए जिले में 600 पुलिस कर्मी लगाए गए हैं। जबकि पिछले साल 500 कर्मियों की ड्यूटी लगाई है। इसके अलावा एसपी ने सभी थाना प्रभारियों को अपने क्षेत्र के शिविरों का निरीक्षण व दौरा करने के निर्देश भी दिए हैं।
इन मंदिरों में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
सबसे ज्यादा भीड़ जिले के पौराणिक एवं स्वयं-भू शिवलिंग मंदिरों में होती है। गांव अमादलपुर स्थित सूर्यकुंड मंदिर, दयालगढ़ का पातालेश्वर महादेव मंदिर, भटली का स्वयं-भू मंदिर, कलेसर स्थित कालेश्वर महादेव मंदिर और आदिबद्री स्थित केदारनाथ शिव मंदिर में स्वयं-भू शिवलिंग हैं। इन पांचों मंदिरों का उल्लेख महाभारत काल के ग्रंथों में मिलता है। भाटली मंदिर के मंदिर जितेंद्र शास्त्री, पातालेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट प्रधान जर्नादन शर्मा ने बताया कि सोमवार को मंदिर में ज्यादा भीड़ होती है। भीड़ नियंत्रित करने के लिए सदस्यों की ड्यूटी लगाई गई है।