संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ट्रॉमा सेंटर का 47 लाख रुपये से नवीनीकरण हो रहा है। इतनी रकम खर्च करने के बाद भी ट्रॉमा सेंटर में जाम सीवरेज की समस्या का समाधान नहीं हो सकेगा। क्योंकि टेंडर में ट्रामा सेंटर के सीवरेज पाइप बदलने का प्रावधान ही नहीं है।
बार-बार जाम होने वाले सीवरेज की समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग छोटे पाइप बदल कर बड़े लगाने की मांग कर रहा था,परंतु ऐसा नहीं किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की इस लापरवाही की वजह से सीवरेज जाम की समस्या लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी बरकरार रहेगी।
ट्रॉमा सेंटर के पुराने भवन का स्वास्थ्य विभाग की तरफ से नवीनीकरण कराया जा रहा है। इसके लिए 47 लाख रुपये विभाग की तरफ से पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर किया गया है। ट्रॉमा सेंटर में कुछ छोटे-मोटे बदलाव किए गए हैं। कुछ दीवारों को तोड़ा गया है। खिड़कियां, दरवाजों को बदला जाना है। वहीं पेंट होगा और फर्श को भी ऊंचा उठाया जा रहा है। इसके अलावा इसमें अग्निकांड से निपटने के लिए इलेक्ट्रानिक फायर सेफ्टी सिस्टम लगाए जाएंगे। जब से ट्रामा सेंटर बना था तब से इसमें बार-बार सीवरेज जाम होता था।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सीवरेज के जो पाइप दबे हैं वह छोटे हैं। पानी की निकासी नहीं होने से वह अक्सर जाम रहते हैं। परंतु ट्रॉमा सेंटर के नवीनीकरण के टेंडर की ड्राइंग में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सीवरेज पाइप बदलने का प्रावधान ही नहीं कराया गया।
इसलिए नवीनीकरण तो हो जाएगा लेकिन जाम सीवरेज का कोई समाधान नहीं हो पाएगा। ट्रॉमा सेंटर के नवीनीकरण का कार्य अगस्त माह में शुरू हो गया था। थोड़ा बहुत काम हुआ तो पेमेंट न होने से ठेकेदार ने काम को बीच में ही रोक दिया। जांच में पता चला कि स्वास्थ्य विभाग ने जो 47 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे वह पीडब्ल्यूडी के खाते में पहुंचे ही नहीं। तकनीकी खामी के चलते वह ट्रेजरी में ही फंस गए थे।
किसी तरह राशि पीडब्ल्यूडी के पास पहुंची भी, लेकिन काम दोबारा शुरू नहीं हो पाया। अब कहा जा रहा है कि ट्रॉमा सेंटर में पहले बिजली से संबंधित काम किया जाएगा इसके बाद मरम्मत आदि का कार्य शुरू किया जाएगा। बिजली के काम के लिए अभी टेंडर लगाया जा रहा है, जिसका काम शुरू होने में ही एक माह का समय लगेगा। ऐसे में ट्रॉमा के नवीनीकरण का कार्य बीच में लटका है।