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स्कूल में 50 फीसदी छात्र-छात्राओं के साथ होगी पढ़ाई

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कोरोना का असर कम होने के बाद वीरवार से छठी से आठवीं कक्षा तक स्कूल खुल रहे हैं। सरकारी व निजी दोनों स्कूलों में 50 फीसदी विद्यार्थियों के साथ पढ़ाई होगी। स्कूलों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इससे पूर्व 16 जुलाई से 9वीं से 12वीं कक्षा तक के स्कूल 50 फीसदी विद्यार्थियों के साथ खुल चुके हैं। जिनमें रोजाना विद्यार्थी अपने अभिभावकों का अनुमति पत्र लेकर, मास्क व सैनिटाइजर के बाद कक्षा में आ रहे हैं। जिले में 110 सरकारी उच्च विद्यालय हैं। जबकि करीब डेढ़ सौ प्राइवेट स्कूल हैं। जिनमें 546133 बच्चे हैं।
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जानकारी के अनुसार छठीं से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी 9वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों की तरह ही ऑनलाइन या ऑफलाइन पढ़ाई कर सकेंगे। सरकारी या निजी स्कूल प्रबंधन किसी भी विद्यार्थी को स्कूल आने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। हालांकि अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल में भेजने के पक्ष में नहीं है। अभिभावकों का कहना है कि जब तक वैक्सीनेशन का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक बच्चों को स्कूल न बुलाया जाएं। खासकर छोटे बच्चों को स्कूल में बुलाना ठीक नहीं है।
इन नियमों का पालन करना होगा अनिवार्य
- मास्क के बिना स्कूल परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
- स्कूल में आने के लिए अभिभावकों की लिखित सहमति आवश्यक है।
- छात्र किसी अन्य छात्र से किसी भी सामग्री का आदान-प्रदान नहीं करेंगे।
- दूसरे छात्र से हाथ नहीं मिलाना है। पीने का पानी साथ लेकर जाना होगा।
- कोई भी छात्र न तो अपनी सीट बदल सकता है और न ही किसी दूसरी कक्षा में जा सकता है।
- यदि किसी छात्र को लगता है कि उसकी तबीयत ठीक नही है तो वह स्कूल न आए।
- उपस्थिति को लेकर कोई बाध्यता नहीं है ।
- छात्रों के लिए विद्यालय का समय प्रात: 9 से 12 बजे तक का रहेगा ।
-गुलशन परूथी का कहना है कि डब्ल्यूएचओ ने पहले ही चेताया हुआ है कि तीसरी लहर का प्रकोप सबसे ज्यादा बच्चों पर देखने को मिल सकता है। इसलिए सही इंतजाम के बिना छोटे बच्चों के लिए स्कूल खोलने का निर्णय बाद में पछतावे का कारण न बन जाए। वैज्ञानिकों का तर्क है कि कोरोना की तीसरी लहर किसी भी समय दे सकती है और स्कूल खुलने के बाद ऐसा ना हो कि जब तक संभलते रह जाए काफी देर ना हो जाए। इसलिए सभी स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा को गंभीरता से लेना चाहिए। उसके बाद ही स्कूल खोलने के बारे में निर्णय लिया जाए।
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कोट्स
-रवीश का कहना है कि पहली व दूसरी लहर मे स्कूल काफी समय तक बंद रहे हैं। सरकार ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूलों को बंद कराया था जो कि निर्णय सरकार का बिल्कुल सही था पर अब सरकार ने जो स्कूल खोलने का निर्णय लिया है वह सही है। क्योंकि काफी बच्चे तो यह भी भूल चुके हैं कि स्कूल भी जाना होता है। सही इंतजाम कर स्कूल खोले जा आ रहे हैं तो कोई दिक्कत की बात नहीं है।
-इंद्रजीत का कहना है कि पिछले काफी समय से पहली और दूसरी लहर में बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से बाधित हुई है। सरकार द्वारा छठी से आठवीं तक स्कूल खोलने का निर्णय सही है। प्रशासन द्वारा सभी स्कूलों में बच्चों के कोरोना को लेकर क्या इंतजाम किए गए हैं। पहले टीमें बनाकर सभी स्कूलों का निरीक्षण कराया जाए। रोजाना सुबह के समय बच्चों की प्राथमिक जांच की जाए। स्कूल खलने पर बहुत ही सावधानी बरतनी होगी।
-मनोज कालरा का कहना है कि इतने महीनों तक बच्चे घर पर थे, अब उन्हें स्कूल भेजने में डर लगता है। स्कूल में बच्चों को एकदूसरे से दूर बिठाया जाता है, लेकिन बच्चे तो जल्दी घुलमिल जाते ही हैं। इसलिए मैंने अपनी बेटी को समझाया है कि दूसरों के साथ खाना-पीना नहीं है। केवल घर से लिया लंच ही खाना है। कोराना काल की वजह से बच्चों को सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा स्कूलों को बंद किया गया था जो निर्णय बिल्कुल सही था। अब सरकार द्वारा सुरक्षा के इंतजाम काफी अच्छे स्तर पर किए जा चुके हैं।
-नवीन अग्रवाल का कहना है कि एक तरफ तो कोरोना की तीसरी लहर आ रही है दूसरी तरफ सरकार स्कूल खोलने जा रही है जो हमारी समझ से दूर है। अभी कोरोना खत्म नही हुआ सरकार ने माता-पिता की सहमति से बच्चे को स्कूल भेजने का नियम बनाया है. लेकिन, माता पिता के लिए ये फैसला लेना मुश्किल हो रहा है।
वर्जन
कोविड-19 प्रोटोकाल के तहत ही स्कूल खोले जाएंगे। स्कूल में शिक्षकों और विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान नियमों का पालन करना होगा। प्रत्येक स्कूल में रोस्टर के अनुसार ही विद्यार्थी बुलाए जाएंगे। एक कक्ष में 20 से अधिक विद्यार्थी नहीं बैठ सकेंगे।
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नमिता कौशिक, डीईओ
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